चित्तौड़गढ़ की माटी से संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच तक …सांसद सी.पी. जोशी..

विशेष रिपोर्ट: आकाश शर्मा

चित्तौड़गढ़ । स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ की पावन और ऐतिहासिक धरा ने हमेशा से ही अपनी वीरता, स्वाभिमान और नेतृत्व से देश को दिशा दी है। उसी समृद्ध माटी के सपूत, जिन्होंने अपने छात्र जीवन से ही राजनीति की वह डोर पकड़ी और अपनी काबिलियत के आधार पर एक-एक पद तय करते हुए आगे बढ़े। वर्ष 2014 में अपना पहला लोकसभा चुनाव जीतकर जनसेवा का जो सिलसिला शुरू किया, वह आज अपनी राजनीतिक यात्रा के तीसरे टर्म की हैट्रिक तक पहुंच चुका है। इसी जनसेवा और कर्मठता के बल पर वे आज एक वैश्विक मंच पर खड़े हैं। यह यहां की देवतुल्य जनता का असीम प्यार और बड़ों-बुजुर्गों का आशीर्वाद ही है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है ।
चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी ने अपनी कार्यकुशलता, विनम्रता और सुदृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर न केवल प्रदेश व राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चित्तौड़गढ़ का परचम लहराया । चित्तौड़गढ़ आगमन पर यूएन (UN) के अपने ऐतिहासिक अनुभवों और वहाँ भारत का पक्ष रखते समय मन में आए भावों को साझा करते हुए कहा कि जब यह जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई, तो प्रारंभ में मन में थोड़ा संकोच और डर था। स्थानीय व क्षेत्रीय राजनीति की बात अलग होती है, किंतु संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक मंच एक भिन्न दायित्व था। मन में अनेक विचार आ-जा रहे थे। अंततः मुझे अपनी चित्तौड़गढ़ की पावन माटी का स्मरण हुआ जिस माटी ने कभी पराजय स्वीकार करना नहीं सीखा और आँखों के सामने देश का तिरंगा फहराने लगा। फिर क्या था, बस मैं था और संयुक्त राष्ट्र का मंच, जहाँ भारत के मान को सर्वोपरि रखते हुए राष्ट्र की आवाज बुलंद की। इस वीर प्रसविनी माटी को मेरा बारंबार वंदन !

UNGA के 81वें सत्र में सांसद सी.पी. जोशी के संबोधन के प्रमुख अंश…

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी एवं अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्यता विस्तार की पुरजोर वकालत की, ताकि यह मंच वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सके । UN की ‘द्वितीय समिति’ में विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए सुलभ, किफायती और समावेशी वित्त पोषण उपलब्ध कराने की मांग की। अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन में भौगोलिक संतुलन और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए महासभा की निर्णय-प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का पक्ष रखा । भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और वित्तीय समावेशन को वैश्विक विकास का मॉडल बताते हुए साझा किया कि कैसे तकनीकी नवाचार से अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी सेवाएं पहुँचाई जा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र में आयोजित ‘हिंदी दिवस’ कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी को वैश्विक समुदायों के मध्य ‘संवाद, सौहार्द और आत्मीयता का सेतु’ बताया।
चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक विरासत से लेकर संयुक्त राष्ट्र के बहुपक्षीय मंच तक, सांसद सी.पी. जोशी का यह प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत के बढ़ते प्रभाव और क्षेत्रीय नेतृत्व की निष्ठा का जीवंत प्रतीक है।