देशभर में चर्चित मेरठ का ‘नीला ड्रम हत्याकांड’: पति की नृशंस हत्या कर शव को सीमेंट में चिनवाने वाली पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा

मेरठ जिला अदालत ने ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी मानकर सुनाया मृत्युदंड, 20-20 हजार रुपये का जुर्माना; 126 पेशियों और 22 गवाहों के बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय

मेरठ (स्मार्ट हलचल)देशभर में सनसनी फैलाने वाले मेरठ के बहुचर्चित ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ में जिला अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सौरभ राजपूत की हत्या के दोषी उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे जघन्य और दुर्लभतम अपराध मानते हुए दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोनों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था, जहां फैसला सुनते ही दोनों भावुक होकर रो पड़े।

टुकड़े कर नीले ड्रम में भरा था सीमेंट, फिर बच्ची को छोड़ भागे हिमाचल

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में हुई थी। मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के लिए शव के टुकड़े कर उसे नीले ड्रम में सीमेंट भरकर सील कर दिया। इसके अगले दिन 4 मार्च को मुस्कान अपनी बच्ची को मायके छोड़कर प्रेमी साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश फरार हो गई। 18 मार्च 2025 को मृतक के भाई बबलू की गुमशुदगी रिपोर्ट के आधार पर जांच करते हुए पुलिस ने घर से नीला ड्रम बरामद कर हत्याकांड का पर्दाफाश किया था।

126 पेशियां, 22 गवाह और फॉरेंसिक साक्ष्यों से साबित हुआ जुर्म

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने करीब एक हजार पन्नों की पुख्ता चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें वैज्ञानिक, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्य शामिल थे। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी करार दिया था, जिसके बाद बुधवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों को फांसी की सजा से दंडित किया।

🛑 नीला ड्रम हत्याकांड : मुख्य बिंदु

  • वारदात: 3 मार्च 2025, ब्रह्मपुरी क्षेत्र (मेरठ)।
  • मृतक: सौरभ राजपूत (पति)।
  • दोषी: मुस्कान रस्तोगी (पत्नी) एवं साहिल शुक्ला (प्रेमी)।
  • सजा: दोनों को फांसी की सजा (मृत्युदंड) व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड।
  • अदालती कार्यवाही: 126 पेशियां, 22 गवाह और 1000 पन्नों की चार्जशीट।

पीड़ित परिवार ने कहा—’न्याय की जीत, आत्मा को मिली शांति’

सजा सुनाए जाने के बाद मृतक सौरभ के परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त किया। सौरभ की मां और भाई ने कहा कि वे लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे और अपराधियों को उनके किए की सही सजा मिली है। परिवार ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी ऊपरी अदालतों में अपील करते हैं, तो वे सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।