नगर परिषद में ‘A.I.’ का राज और शहर पर ‘Ai ‘ के काले कारोबार का साया ! चरित्र हनन और चित्तौड़गढ़ की राजनीति का काला सच…………..

विशेष रिपोर्ट -आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ । स्मार्ट हलचल|शहर में अभी निकाय चुनाव का शोर पूरी तरह थमा भी नहीं था कि पंचायती राज चुनाव का रणसंग्राम छिड़ चुका है। निकाय चुनाव में जनता ने 34 भाजपा पार्षदों पर भरोसा जताया, तो वहीं 34 भाजपा और 2 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन ने ‘A.I.’ को शहर के नगर परिषद की कुर्सी सौंप दी । चौंकिए मत ! यहाँ बात कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नहीं, बल्कि हमारे शहर के सभापति अनिल ईनाणी (A. I.) की हो रही है।
लेकिन इस राजनीतिक ‘A.I.’ के दौर के बीच, एक दूसरा ‘Ai’ यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शहर के क्षितिज पर खौफनाक मंजर बनकर मंडरा रहा है। जिस तकनीक को मानव विकास, पारदर्शी प्रशासन और आधुनिकता का ध्वजवाहक बनना था, आज वही तकनीक चित्तौड़गढ़ की पावन धरा पर चरित्र हनन का सबसे गंदा अस्त्र बन चुकी है। सूत्रों का कहना है कि रातों-रात अमीर बनने का सपना देखने वाला बेखबर युवा वर्ग इस डिजिटल सिंडिकेट का मोहरा बन रहा है। पर्दे के पीछे छिपे राजनीतिक आस्तीन के सांप इन युवाओं के हाथों में तकनीक का ज़हर थमाकर अपने विरोधियों का शिकार कर रहे हैं। फर्जी ऑडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें और डीपफेक वीडियो साजिश का ऐसा मायाजाल बुना जाता है कि जब तक पीड़ित संभल पाए, तब तक समाज, परिवार और कारोबार में उसकी बरसों की साख राख हो चुकी होती है !
कॉरपोरेट पर मंडराता ‘ब्लैकमेल’ का साया !
यह खतरा सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं है । जिले की बड़ी औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वरिष्ठ अधिकारी और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी का बजट संभालने वाले प्रमुख लोग इन दिनों सबसे ज्यादा निशाने पर हैं । राजनीतिक स्वार्थ और मनमर्जी के टेंडर या अवैध काम निकलवाने के लिए कॉरपोरेट अधिकारियों को Ai के जरिए फर्जी सबूत रचकर डराने-धमकाने का खेल जारी है । प्रशासनिक विरोध होने पर किसी भी अधिकारी की सोशल मीडिया प्रोफाइल फेसबुक, इंस्टाग्राम से डेटा उठाकर चंद मिनटों में उसकी फर्जी डिजिटल छवि गढ़ दी जाती है ।गौरतलब है कि हमारा जिला एक आद्यौगिक हब कहलाता है जंहा हिदुस्तान जिंक, बिरला सीमेन्ट, नवोको सीमेन्ट, आदित्य सीमेन्ट, जेके सीमेेट, वंडर सीमेन्ट और भी गंगरार क्षेत्र में अन्य कई अलग अलग इकाइयों के प्लांट लगें है ।

पूर्व सभापति शर्मा का मामला, Ai षड्यंत्र का जीता-जागता प्रमाण !
यह कोई हवा-हवाई आशंका नहीं है, बल्कि चित्तौड़गढ़ इसका कड़वा सच झेल चुका है । पूर्व नगर परिषद सभापति शर्मा का मामला इसका जीवंत और भयावह उदाहरण है । Ai के जरिए उनके कंटेंट और फोटो-वीडियो को टेंपर कर शहर में फैलाया गया । यद्यपि कानून और न्यायपालिका नें अपनी निगरानी में स्टेस्ट रिपोर्ट पर हाई कोर्ट के आदेश पर पुलिस नें इस मामले में FR पेश कर दी l पुलिस जांच में भी मामला झूठा निकला वायरल फोटो और वीडियो जों मर्ज किये गये थे,को सही नही माना, लेकिन क्या उनका खोया हुआ सम्मान वापस लौट पाया ? सूत्रों की मानें तो इस डिजिटल षड्यंत्र के पीछे चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट से भविष्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं और कांग्रेस के ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनकी दावेदारी को खत्म करने की गंदी साजिश थी । लेकिन Ai के इस अदृश्य वार ने उनकी व्यक्तिगत छवि पर जो घाव दिए,उनका जवाबदार कौन है ?
पंचायत चुनाव पर मंडराता ‘Ai का साया’ !
चित्तौड़गढ़ में Ai के इस गंदे खेल का यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले पंचायत चुनावों में शहर के निष्पक्ष और निर्भीक एक या दों प्रमुख पत्रकारों को निशाना बनाने की तैयारी चल रही है, ताकि उनकी आवाज को दबाया जा सके । भदेसर या बेगूं में नई विधानसभा बनने की स्थिति में जो संभावित प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरने का माद्दा रखते हैं, उन्हें अभी से ही Ai के जरिए ट्रैक और टारगेट किये जाने की संभावना से भी इंकार नही किया जा सकता है ।

तकनीक वरदान है, लेकिन ‘डिजिटल डकैतों’ का क्या !
इसमें कोई दो राय नहीं कि Ai ने सरकारी दफ्तरों, उद्योगों और आम कामकाज को बेहद आसान बनाया है। तकनीक का सही इस्तेमाल तरक्की का रास्ता खोलता है। लेकिन जब इंसान द्वारा बनाई गई यह तकनीक किसी निर्दोष की सामाजिक हत्या का जरिया बन जाए, तो इसे सिर्फ ‘तकनीकी अपवाद’ कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चित्तौड़गढ़ के जिला प्रशासन, पुलिस की साइबर सेल और आम जनता को अब जागना होगा । यदि समय रहते इन ‘डिजिटल डकैतों’ और पर्दे के पीछे बैठे उनके राजनीतिक आकाओं पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो कल इसका शिकार कोई भी व्यवसायी, अधिकारी, जनप्रतिनिधि या आम नागरिक बन सकता है ।
सवाल सीधा है क्या हम Ai का स्वागत एक बेहतर भविष्य के लिए कर रहे हैं या किसी के चरित्र की बलि चढ़ाने के लिए? अब वक्त आ गया है कि AI के इस काले कारोबार की तह तक जाकर इसके मास्टरमाइंड्स को बेनकाब किया जाए ?