श्रीराम के त्याग और भरत के समर्पण ने जीता दर्शकों का दिल, सीता हरण ने बढ़ाया कथा का रोमांच

पंचवटी से सीता हरण तक रामायण के प्रसंगों का मंचन, कलाकारों ने बांधा समां

आरके पुरम के श्री महर्षि गौतम रामलीला पार्क में हुआ मंचन, रामायण के प्रसंगों ने दर्शकों को किया भावविभोर

भरतहि होइ न राजमदु, बिधि हरि हर पद पाइ,कबहुँ कि काँजी सीकरनि, छीरसिंधु बिनसाइ

कोटा।स्मार्ट हलचल|आरके पुरम-ए स्थित श्री महर्षि गौतम रामलीला पार्क में श्री रामलीला आयोजन समिति, आरके पुरम-ए एवं नगर निगम कोटा के संयुक्त तत्वावधान में रामलीला का मंचन किया जा रहा है।समिति के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा एवं महामंत्री गिरिराज गौतम ने बताया कि बजरंग रामलीला लोक कला मंडल, नागौर के कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों का सजीव मंचन कर दर्शकों को धर्म, मर्यादा और त्याग के आदर्शों से रूबरू कराया। मंचन में भरत मिलाप से लेकर सीता हरण तक के प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया।
मीडिया प्रभारी पीपी गुप्ता ने बताया कि भरत मिलाप के प्रसंग में भगवान श्रीराम के प्रति भरत के अगाध प्रेम, त्याग और भ्रातृभक्ति का मार्मिक चित्रण किया गया। भरत अयोध्या का राजपाट स्वीकार करने के बजाय श्रीराम को वापस लाने के लिए वन पहुंचते हैं। श्रीराम पिता के वचन और मर्यादा का पालन करते हुए वनवास पूरा करने के अपने संकल्प पर अडिग रहते हैं। दोनों भाइयों के मिलन के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
*भरतहि होइ न राजमदु, बिधि हरि हर पद पाइ। कबहुँ कि काँजी सीकरनि, छीरसिंधु बिनसाइ॥*
इसके बाद पंचवटी में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। रावण की बहन शूर्पणखा के प्रसंग से कथा आगे बढ़ी। शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए रावण ने मारीच की सहायता से सीता हरण की योजना बनाई। मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचा। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता ने श्रीराम से उसे लाने का आग्रह किया। श्रीराम मृग के पीछे चले गए और उनके बाण से घायल मारीच ने श्रीराम की आवाज में पुकार लगाई।
माता सीता के आग्रह पर लक्ष्मण भी श्रीराम की सहायता के लिए वन में गए। इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया पहुंचा और छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लिया। सीता हरण के प्रसंग ने दर्शकों को अधर्म के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की विजय का संदेश दिया।

मुख्य संयोजक एवं पूर्व पार्षद बालचंद फौजी ने बताया कि रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वागत करने वालों में चंद्र प्रकाश माहेश्वरी, सत्य प्रकाश शर्मा, सीताराम शर्मा, रामस्वरूप छंदक, नरेश कुकरेजा, रामस्वरूप गोचर, मांगीलाल पांचाल, विष्णु नारायण शर्मा, मुकेश सोनी, जितेंद्र सिंह, किशन लाल, हनुमान सेन, योगेश सुमन एवं अनिता गौतम शामिल रहे।
मीडिया प्रभारी पीपी गुप्ता ने बताया कि आगामी मंचन में भी रामायण के प्रमुख प्रसंगों को प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में अतिथि नरेंद्र बिरला तथा प्रायोजक अतिथि कुलदीप माथुर, डॉ. अमरीश पाटोदी, डॉ. विकास खंडेलिया, जगदीश गौतम और डॉ. के.बी. गुप्ता सहित अन्य गणमान्यजन की सहभागिता रहेगी।