जिला साहित्यकार परिषद् की काव्य गोष्ठी में बही साहित्य की सरिता, कवियों ने रचनाओं से बांधा समां

(पंकज पोरवाल)

दुर्गा महिमा से पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं तक, कविताओं ने छुआ मन, कविताओं में गूंजी भक्ति, संवेदना और जिंदगी के रंग

ओम उज्ज्वल के गीत संग्रह ‘माटी की महक’ और श्यामसुंदर तिवारी के बाल कविता संग्रह ‘खिलते फूल महकते बच्चे’ का विमोचन

भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल|दुर्गा माता की महिमा, नवरात्रि की भक्ति, सामाजिक सरोकारों और जीवन के विविध रंगों पर रची कविताओं ने साहित्यिक माहौल को भावपूर्ण बना दिया। अवसर था जिला साहित्यकार परिषद् की मासिक काव्य गोष्ठी का, जो सिन्धुनगर स्थित हेमू कालानी सिन्धी शिक्षण संस्था परिसर में आयोजित हुई। गोष्ठी में कवियों ने गजल, गीतिका, गीत और मुक्त छंद की रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। इस दौरान परिषद् के दो सदस्यों की नवप्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता दयाराम मेठानी ने की, जबकि संचालन महेंद्र शर्मा ने किया। काव्य पाठ का शुभारंभ करते हुए बंसीलाल पारस ने आंखों के हंसने-रोने और जीवन की विडंबनाओं को पंक्तियों में पिरोयाकृ ‘पनघट पर आंखें हंसती हैं, मरघट पर आंखें रोती हैं, मैं अब तक समझ नहीं पाया, यह आंख मिचौनी क्यों होती है।’ ओम उज्ज्वल ने नवरात्रि की महिमा पर रचना प्रस्तुत करते हुए देवी आराधना और भक्ति के वातावरण को स्वर दिए। श्यामसुंदर तिवारी ने माता के 51 शक्तिपीठों पर आधारित कविता सुनाई। अपेक्षा पारीक ने प्रेम और वफा की भावनाओं को शब्द दिए, वहीं दीपिका शर्मा ने पेड़ों की कटाई और घटती वादियों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गोपाल शर्मा ने गांव की गलियों, चौपाल और तारों की छांव के माध्यम से ग्रामीण जीवन की स्मृतियों को जीवंत किया। नरेंद्र वर्मा ने बढ़ती उम्र में जीवन के संघर्ष और दर्द को अपनी रचना में अभिव्यक्त किया। राजेश मित्तल ने गम के बादलों के बीच भावनाओं को व्यक्त करने का संदेश दिया। महेंद्र शर्मा ने दूसरों के दुख को अपना दर्द समझने की संवेदनशीलता को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। वहीं, अध्यक्ष दयाराम मेठानी ने नफरत से आहत मानव मन और जीवन में बढ़ते वैमनस्य को रेखांकित करते हुए प्रेम व सद्भाव की आवश्यकता पर बल दिया। जयप्रकाश भाटिया ने कली और पुष्प के अंतर पर आधारित रचना सुनाई, जबकि अजीज जख्मी ने जिंदगी की मुश्किलों और संघर्षों को अपनी कविता में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कवियों की विविध विषयों पर आधारित रचनाओं ने गोष्ठी को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया। काव्य गोष्ठी के दौरान साहित्यकार ओम उज्ज्वल के गीत संग्रह ‘माटी की महक’ तथा श्यामसुंदर तिवारी के सचित्र बाल कविता संग्रह ‘खिलते फूल महकते बच्चे’ का विमोचन किया गया। दोनों पुस्तकों में संकलित रचनाओं की सराहना की गई। बाल कविताओं के सचित्र संग्रह के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर साहित्यकारों ने रचनात्मक लेखन और साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।