माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने संयुक्त निदेशकों को दिए निर्देश-कार्यमुक्ति व कार्यग्रहण नहीं होने के कारणों के साथ न्यायिक मामलों की भी देनी होगी जानकारी
शिवराज बारवाल मीना
टोंक। स्मार्ट हलचल|राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण नहीं करने वाले राज्यभर के 211 प्राचार्यों एवं समकक्ष कार्मिकों के मामलों में सख्ती दिखाई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने संबंधित अधिकारियों से इन प्रकरणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सूची के अतिरिक्त यदि कोई अन्य प्राचार्य या समकक्ष कार्मिक स्थानांतरण के बाद कार्यमुक्त अथवा कार्यग्रहण नहीं कर पाया है, तो उसका विवरण भी रिपोर्ट में शामिल करना होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, विभिन्न अवधियों में प्राचार्य, उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं समकक्ष कार्मिकों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद शाला दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी में कई कार्मिकों का नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण दर्ज नहीं है। ऐसे में विभाग ने प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
*न्यायिक मामलों की भी देनी होगी जानकारी*
निदेशालय ने संबंधित संयुक्त निदेशकों को निर्देशित किया है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद कार्मिकों को कार्यमुक्त नहीं करने अथवा उनके नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण नहीं करने के कारणों की स्पष्ट जानकारी निर्धारित प्रपत्र में उपलब्ध कराई जाए। यदि किसी कार्मिक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो संबंधित वाद संख्या और उसकी अद्यतन स्थिति का विवरण भी देना होगा। इसके अलावा कार्यमुक्ति या कार्यग्रहण में बाधा बनने वाले अन्य कारणों का उल्लेख करना भी अनिवार्य होगा, ताकि प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
*निर्धारित प्रारूप में देनी होगी सूचना*
विभाग की ओर से जानकारी संकलित करने के लिए निर्धारित प्रारूप जारी किया गया है। इसमें कार्मिक का नाम, कर्मचारी आईडी, वर्तमान पदस्थापन जिला, नवीन पदस्थापन स्थल, स्थानांतरण आदेश की तिथि, कार्यमुक्ति अथवा कार्यग्रहण नहीं होने का कारण, न्यायिक वाद संख्या, मामले की वर्तमान स्थिति और अन्य संबंधित जानकारियां शामिल करनी होंगी।
*ई-मेल से अविलंब भेजनी होगी समेकित रिपोर्ट*
निदेशालय ने अधीनस्थ कार्यालयों से सूचना संकलित कर संबंधित संयुक्त निदेशक कार्यालय के माध्यम से रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। मंडल कार्यालयों को अपने संपूर्ण मंडल की समेकित सूचना तैयार कर निर्धारित ई-मेल establishmentbsection@gmail.com पर अविलंब प्रेषित करनी होगी। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से स्थानांतरण आदेशों की पालना नहीं होने के मामलों में प्रशासनिक, न्यायिक और अन्य बाधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर विभाग संबंधित कार्मिकों की कार्यमुक्ति एवं कार्यग्रहण से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा कर सकेगा।
*राज्यभर में कार्यग्रहण नहीं करने वाले प्राचार्यों की जिलेवार स्थिति*
उपलब्ध सूची के अनुसार, राज्यभर में कुल 211 प्राचार्य एवं समकक्ष कार्मिक कार्यग्रहण नहीं करने वाले मामलों में शामिल हैं। जिलेवार विवरण इस प्रकार है—
जयपुर: 34
जोधपुर: 16
चूरू: 13
सीकर: 12
झुंझुनूं: 11
उदयपुर: 8
कोटा: 7
अलवर: 7
बाड़मेर: 6
अजमेर: 5
टोंक: 5
भीलवाड़ा: 5
सिरोही: 4
राजसमंद: 4
बीकानेर: 4
डूंगरपुर: 4
खैरथल-तिजारा: 4
बूंदी: 3
डीग: 3
हनुमानगढ़: 3
कोटपूतली-बहरोड़: 3
सलूंबर: 3
दौसा: 2
सवाई माधोपुर: 2
करौली: 2
बालोतरा: 2
बारां: 2
ब्यावर: 2
चित्तौड़गढ़: 2
डीडवाना-कुचामन: 2
जालौर: 2
पाली: 2
फलोदी: 2
बांसवाड़ा: 1
भरतपुर: 1
धौलपुर: 1
झालावाड़: 1
नागौर: 1
*कार्मिकों के हितों का भी ध्यान रखे विभाग : सलावद*
शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि स्थानांतरण आदेशों की पालना सुनिश्चित करना विभागीय व्यवस्था के लिए आवश्यक है, लेकिन कार्यमुक्ति और कार्यग्रहण नहीं होने के प्रत्येक प्रकरण की परिस्थितियों की निष्पक्ष समीक्षा भी की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्मिक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है अथवा किसी प्रशासनिक कारण से वह नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण नहीं कर पाया है, तो उसके पक्ष को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए। सलावद ने शिक्षा विभाग से मांग की कि ऐसे मामलों में नियमानुसार एवं पारदर्शी तरीके से निर्णय लिया जाए। साथ ही कार्मिकों के हितों और उनके न्यायसंगत पक्ष का ध्यान रखा जाए, ताकि विभागीय व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी भी कार्मिक के साथ अन्याय नहीं हो।