सीटू के जिला सम्मेलन में श्रमिकों के शोषण, न्यूनतम वेतन और श्रम कानूनों पर उठी आवाज,
दिसंबर में दिल्ली में होगा देशव्यापी विरोध प्रदर्शन
भीलवाड़ा
स्मार्ट हलचल|भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) का जिला सम्मेलन रविवार को संत कंवर राम धर्मशाला में आयोजित हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता साथी आरके स्वामी ने की। सम्मेलन में श्रमिकों के अधिकारों, न्यूनतम वेतन, श्रम कानूनों में बदलाव और बढ़ते निजीकरण को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों को अपने अधिकार हासिल करने के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा, क्योंकि बिना संघर्ष के अधिकार नहीं मिलते।
सम्मेलन में सीटू के प्रदेश अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में श्रमिकों के सामने अपने अधिकारों की रक्षा करना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां श्रमिकों के हितों के विपरीत हैं और श्रमिकों के शोषण का रास्ता खोल रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रत्येक नागरिक को सुलभ होनी चाहिए, लेकिन इन क्षेत्रों में निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने से आम जनता और श्रमिक वर्ग प्रभावित हो रहा है।
शेखावत ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान महंगाई को देखते हुए एक श्रमिक को कम से कम 42 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलना चाहिए, ताकि वह अपने परिवार का समुचित भरण-पोषण कर सके। उन्होंने मौजूदा न्यूनतम वेतन को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि इतनी कम राशि में परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल है। उन्होंने श्रमिकों के हड़ताल करने के अधिकारों पर प्रतिबंधों, ठेका प्रथा और श्रमिकों के हितों की अनदेखी पर भी चिंता जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर उनकी जगह श्रम संहिताएं लागू करने से श्रमिकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं। ठेका श्रमिकों के शोषण की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने और निर्माण श्रमिकों की कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन की एकता और सामूहिक संघर्ष जरूरी है।
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए आरके स्वामी ने कहा कि संगठन की एकता बनाए रखने के लिए श्रमिकों का संगठित रहना आवश्यक है। अपने अधिकारों की रक्षा करने और शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने श्रमिकों से संगठन को मजबूत बनाने और अपने हक की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
सम्मेलन में आगामी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर 1 से 3 दिसंबर तक दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए भीलवाड़ा जिले से 100 श्रमिकों को दिल्ली ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। सम्मेलन में उपस्थित श्रमिक साथियों ने इस निर्णय पर सहमति जताई।
इस दौरान राजीविका, बुनकर, मिड-डे मील तथा टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों की समस्याओं और संगठनात्मक गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। राजीविका से जुड़ी अनीता कंवर, टीना कंवर, सरिता, शमीम बानो और हेमलता गर्ग सहित अन्य श्रमिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मिड-डे मील श्रमिक यूनियन के चुनाव में विमला देवी को अध्यक्ष तथा मोदी देवी को महामंत्री चुना गया।
सम्मेलन में राजीविका राजस्थान की महामंत्री कैलाश कंवर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव जिला सचिव कुलदीप सिंह, प्रदेश प्रतिनिधि रामेश्वर लाल जाट, टेक्सटाइल श्रमिक यूनियन अध्यक्ष सोनू शर्मा तथा संत कंवर राम ट्रस्ट के सचिव ईश्वर आसनानी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मौजूद रहे। टेक्सटाइल क्षेत्र से गणेश गहलोत, संपत शर्मा, सद्दाम हुसैन, करण सिंह, रामनिवास, बबलू सिंह, अनार सिंह, जोरा बानो, विमला देवी बिश्नोई, भंवरी देवी बिश्नोई और सुरेंद्र बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लिया। सम्मेलन का संचालन सीटू के प्रदेश सचिव ओमप्रकाश देवानी ने किया।