साइबर अपराधों से बचाव के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ संस्कार भी जरूरी : कुलगुरु डुकवाल

कोटा विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी पर सेमिनार, डिजिटल जागरूकता पर दिया जोर

सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए तकनीकी दक्षता के साथ नैतिकता जरूरी — कुलगुरू (डॉ.) विमला डुकवाल

कोटा। स्मार्ट हलचल|डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करना समय की प्रमुख आवश्यकता है। तकनीक का उपयोग करते समय सतर्कता, विवेक और नैतिक मूल्यों का पालन साइबर अपराधों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य से कोटा विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत ‘एनईपी-2020 सारथी गतिविधि’ के तहत ‘साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी के लिए रणनीतियां’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की संयोजक एवं एनईपी-2020 नोडल अधिकारी प्रो. नीलू चौहान ने बताया कि अध्यक्षता कुलगुरू प्रो. (डॉ.) विमला डुकवाल ने की वहीं मुख्य वक्ता आर-कैट सेंटर, कोटा के संभागीय प्रभारी एवं निदेशक डॉ. आशुतोष कुमार रहे। इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेल की ओर से प्रो. नीलू चौहान के मार्गदर्शन में तैयार विशेष प्लांटर भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. (डॉ.) विमला डुकवाल ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए तकनीकी जानकारी के साथ व्यक्तित्व निर्माण, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों का उपयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। संस्कारों से जुड़ा व्यक्तित्व व्यक्ति को सही-गलत का विवेक प्रदान करता है। डिजिटल दुनिया में भी यही विवेक उसे अनावश्यक जोखिम उठाने, भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास करने और अपनी निजी जानकारी असावधानी से साझा करने से बचा सकता है।
सेमिनार के मुख्य वक्ता आर-कैट सेंटर, कोटा के संभागीय प्रभारी एवं निदेशक डॉ. आशुतोष कुमार ने साइबर सुरक्षा की मौजूदा चुनौतियों और डेटा गोपनीयता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग करने, व्यक्तिगत सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा साइबर खतरों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कुलगुरु ने विद्यार्थियों से तकनीक को ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्रगति के साथ सुरक्षा के प्रति सजगता और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध भी विकसित होना चाहिए। तकनीक का सुरक्षित एवं संतुलित उपयोग ही उसके वास्तविक लाभ सुनिश्चित कर सकता है।
कंप्यूटर विज्ञान एवं सूचना विज्ञान विभाग की अध्यक्ष एवं शोध निदेशक प्रो. रीना दाधीच ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए साइबर सुरक्षा का मूल मंत्र ‘स्टॉप, थिंक बिफोर क्लिक’ दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी लिंक पर क्लिक करने, अनजान संदेश खोलने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में एनईपी-2020 कैंपस राजदूत युवराज सिंह, गौरव सिंह, आशीष राठौर एवं श्रेया शर्मा, एनईपी-2020 सचिव शिखा दाधीच, अधिष्ठाता स्नातकोत्तर घनश्याम शर्मा, डॉ. सपना भार्गव और डॉ. रंजना गुप्ता उपस्थित रहे।