बड़ी खबर: पदमुक्त होने के बाद भी धड़ल्ले से गाड़ी पर लगी रही ‘सरपंच’ की नेम प्लेट, प्रशासनिक आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां

केकड़ी / अजमेर|स्मार्ट हलचल|राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा स्पष्ट आदेश जारी कर पदमुक्त किए जाने के बावजूद, देवगांव की पूर्व सरपंच एवं प्रशासक श्रीमती गौतम देवी सुवालका द्वारा नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। राजकीय कार्यों में अनियमितता पाए जाने के कारण राज्य सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया था, इसके बावजूद चुनावी माहौल और वोटिंग प्रक्रिया के दौरान भी उनकी गाड़ी पर ‘सरपंच’ पद की नेम प्लेट लगी हुई पाई गई, जो कि प्रशासनिक आदेशों और आचार संहिता के नियमों की गंभीर अवहेलना की श्रेणी में आता है।
### **क्या है पूरा मामला?**
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग (जांच शाखा, अजमेर) द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ 3(अ7)परावि/जांच/अजमेर/2026/ई-90514) के अनुसार, श्रीमती गौतम देवी सुवालका पत्नी रमेश सुवालका, निवर्तमान सरपंच सह प्रशासक ग्राम पंचायत देवगांव (पंचायत समिति केकड़ी, जिला अजमेर) को राजकीय कार्यों में अनियमितता बरतने का दोषी पाया गया था। मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद अजमेर की जांच रिपोर्ट में उत्तरदायी ठहराए जाने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें ग्राम पंचायत देवगांव के प्रशासक पद से पूर्णतः पदमुक्त कर दिया था।
यह आदेश सक्षम स्तर से अनुमोदित होने के बावजूद, जमीनी स्तर पर इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है। प्राप्त तस्वीरों और साक्ष्यों के अनुसार, पदमुक्त किए जाने के बाद भी उनकी निजी गाड़ी (नंबर: RJ 48 UA 1532) पर खुलेआम ‘सरपंच’ की नेम प्लेट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
### **नियमों का खुला उल्लंघन और चुनावी प्रभाव**
विशेषज्ञों और प्रशासनिक नियमों के जानकारों का मानना है कि किसी भी पद से हटाए जाने या प्रशासनिक कार्रवाई के तहत पदमुक्त होने के बाद उस पद के आधिकारिक प्रतीक, बोर्ड या नेम प्लेट का उपयोग करना कानूनी रूप से अवैध है। खासकर चुनावी या वोटिंग प्रक्रिया के दौरान इस तरह के पदसूचक चिह्नों का वाहन पर प्रदर्शन मतदाताओं को प्रभावित करने और अपनी धाक जमाने का प्रयास माना जाता है।
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों से मांग की है कि ऐसे गैर-कानूनी कृत्यों पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। पदमुक्त हो चुके व्यक्ति द्वारा प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना करते हुए इस प्रकार रौब गालिब करना चुनावी निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान खड़े करता है।
अब देखना यह होगा कि जिला कलक्टर अजमेर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद तथा केकड़ी विकास अधिकारी इस मामले में क्या सख्त कार्रवाई करते हैं, क्योंकि यह सीधा-सीधा शासन के आदेशों की अवमानना का मामला है।