18वें स्थापना दिवस पर देशभर में हुए आयोजन, राष्ट्रीय संगठक लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने किया स्वदेशी खेलों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान
भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल|अपना देश, अपनी माटी और अपना स्वदेशी खेल। इसी भावना के साथ भारत के स्वदेशी खेल ड्रॉप रोबॉल का 18वां स्थापना दिवस देश के 22 राज्यों में उत्साह और खेल भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कहीं कार्यशालाओं के माध्यम से युवाओं को खेल के प्रति जागरूक किया गया, तो कहीं विद्यार्थियों ने वाद-विवाद प्रतियोगिता में अपने विचार रखे। राजस्थान के भीलवाड़ा में लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी के मैदान पर बालिकाओं ने ड्रॉप रोबॉल प्रतियोगिता में अपने खेल कौशल और दमखम का शानदार प्रदर्शन किया।
ड्रॉप रोबॉल महासंघ के राष्ट्रीय संगठक अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने बताया कि स्थापना दिवस के आयोजन का उद्देश्य स्वदेशी खेलों को प्रोत्साहन देना, युवाओं को खेल संस्कृति से जोड़ना और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। देश के 22 राज्यों में आयोजित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से खेल के प्रचार-प्रसार और अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी का संदेश दिया गया।
उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आपसी सहयोग विकसित करने का भी सशक्त जरिया हैं। स्वदेशी खेलों को व्यापक पहचान दिलाने के लिए समाज, शिक्षण संस्थानों, खेल संगठनों और युवाओं को मिलकर प्रयास करने होंगे।
गुजरात में महाविद्यालय स्तर पर ड्रॉप रोबॉल विषयक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों को इस खेल की जानकारी देने और इसके प्रति रुचि विकसित करने पर जोर दिया गया। बिहार में खेल विषयक वाद-विवाद प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को खेलों के महत्व और समाज में उनकी भूमिका पर विचार व्यक्त करने का अवसर मिला। देश के अन्य राज्यों में भी स्थापना दिवस पर विभिन्न गतिविधियों के जरिए स्वदेशी खेल को प्रोत्साहित किया गया।
भीलवाड़ा में लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी के खेल मैदान पर आयोजित बालिका प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। प्रतियोगिता में सिंगल और डबल्स वर्ग के मुकाबले हुए, जिनमें बालिकाओं ने एकाग्रता, तालमेल और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का परिचय दिया। खिलाड़ियों के उत्साह ने यह संदेश दिया कि बेटियों को उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलें तो वे खेल के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
बालिकाओं की भागीदारी ने खेलों में महिला सशक्तीकरण और समान अवसरों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। खेल मैदान पर उतरकर बेटियां न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करती हैं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण जैसे गुण भी विकसित करती हैं। ऐसे आयोजन उभरती प्रतिभाओं को अपनी क्षमता परखने और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देते हैं।
अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वदेशी खेलों को अपनाएं और उनके प्रचार-प्रसार में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने बालिकाओं को खेलों में आगे बढ़ाने तथा उन्हें प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के समान अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी खेलों को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल संस्थानों में नियमित गतिविधियों के आयोजन से नई प्रतिभाओं को सामने लाया जा सकता है। इसके लिए खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, पर्याप्त अवसर और अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराना जरूरी है।
ड्रॉप रोबॉल के 18वें स्थापना दिवस पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों ने स्वदेशी खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवा पीढ़ी को खेलों से जोड़ने का संदेश दिया। भीलवाड़ा में बालिकाओं की प्रतियोगिता ने इस आयोजन को विशेष पहचान दी। संदेश साफ है—स्वदेशी खेलों को सम्मान मिले, युवाओं को अवसर मिलें और बेटियों को आगे बढ़ने का मंच मिले, तभी देश की खेल प्रतिभाओं को नई दिशा और नई पहचान मिल सकेगी।