सुरों से सजी रंगीन शाम, अनुराधा पौडवाल के जन्मदिवस पर स्वर साधकों ने बांधा समां
निंबाहेड़ा के श्री दयानंद सभागार में गीत-संगीत की महफिल; कलाकारों की प्रस्तुतियों को मिली सराहना
निंबाहेड़ा। स्मार्ट हलचल|पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पार्श्व एवं भजन गायिका अनुराधा पौडवाल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को गीत-संगीत से सजी सुरमयी शाम का आयोजन किया गया। श्री दयानंद चैरिटेबल फाउंडेशन एवं सुर सागर म्यूजिकल ग्रुप, निंबाहेड़ा के संयुक्त तत्वावधान में जेके बाउंड्री वॉल रोड स्थित श्री दयानंद सभागार में शाम 6:30 से रात 10 बजे तक संगीत की स्वर लहरियां गूंजती रहीं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आई.पी.एस. मेमोरियल फाउंडेशन, चित्तौड़गढ़ के संस्थापक विजय मलकानी थे। अध्यक्षता शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य अरविंद मूंदड़ा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में हरीश मालानी, बंसीलाल जीवनानी, यू.एस. शर्मा, ममता राघवम और माया चौहान मंचासीन रहे।
कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
विजय मलकानी, प्रदीप ऋषि, ऋषि कुमार, ममता राघवम, जगदीश बैरागी, रियाज भाई, गौरीशंकर सोलंकी, नरेंद्र लोठ, रेखा सोलंकी, राकेश गुप्ता, डॉ. महेंद्र चौहान, सुनीता चौहान, सुरेश सुथार, वजाहत खान, नवजीत जैन, दिलीप बक्शी, नीलम पालीवाल, कैलाश तोलंबिया, विशाल धारू, सुनील घावरी, दीपक राज कीर, श्याम पुरस्वानी और भूमिका सेन सहित कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं। हर प्रस्तुति के बाद सभागार तालियों से गूंज उठा।
कलाकारों ने ‘यारी है ईमान मेरा’, ‘परदा है परदा’, ‘दिल में तू, सांसों में तू’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘छूकर मेरे मन को’, ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको’, ‘ओ साथी रे’, ‘नज़र के सामने’ और ‘पल-पल दिल के पास’ सहित अनेक लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों ने साबित किया कि छोटे शहरों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
कविता, स्तुति और आभार के साथ समापन
ऋषि राघवम ने महाभारत की प्रमुख घटनाओं पर प्रभावी कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम संयोजक भजन जिज्ञासु ने श्रीराम स्तुति के साथ आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त इंजीनियर हजारीलाल मेघवाल ने किया।