भीलवाड़ा के व्यापारी ने एसबीआई अधिकारियों पर लगाया 70.61 लाख रुपये लेकर कम जमीन उपलब्ध कराने का आरोप, हाईकोर्ट में याचिका के बाद मामले ने पकड़ा तूल
(पंकज पोरवाल)
भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल|शहर के एक व्यापारी के साथ भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से आयोजित ई-नीलामी में लाखों रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप सामने आया है। पीड़ित व्यापारी ने बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पहले मांडल थाने और बाद में जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली। मामले में जोधपुर हाईकोर्ट के विद्वान न्यायाधीश सुनील बेनीवाल ने याचिका का निस्तारण करते हुए निर्देश दिए कि यदि याचिकाकर्ता संबंधित प्राधिकरण के समक्ष कोई प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है तो प्राधिकरण उसके तथ्यों और उसमें उठाई गई शिकायतों पर विचार कर कानून के अनुसार कार्रवाई करे। इधर, जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने भी मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। शहर की वर्द्धमान कॉलोनी निवासी प्रवीण पुत्र मनोहरलाल चंडालिया ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक की ओर से 9 दिसंबर 2025 को आयोजित ई-नीलामी के माध्यम से उन्होंने मांडल कस्बे के समीप स्थित 3135 वर्ग मीटर औद्योगिक भूमि 70 लाख 61 हजार रुपये में खरीदी थी। इस भूमि की संपूर्ण राशि उन्होंने 24 दिसंबर 2025 को जमा करवा दी। व्यापारी का आरोप है कि बैंक अधिकारी वंदना, महिमा गुप्ता और ओमप्रकाश मिश्रा ने मिलीभगत कर उनके साथ धोखाधड़ी की। नीलामी में दर्शाई गई 3135 वर्ग मीटर भूमि के बजाय मौके पर केवल करीब 1906 वर्ग मीटर जमीन ही उपलब्ध है। इसके चलते उन्हें खरीदी गई भूमि का भौतिक कब्जा भी नहीं दिया जा रहा है। व्यापारी का कहना है कि उन्होंने पूरी राशि चुकाने के बावजूद न तो उन्हें नीलामी में दर्शाई गई पूरी जमीन मिली और न ही उसका कब्जा मिल पाया।
एसपी को परिवाद देकर कार्रवाई की मांग
पीड़ित व्यापारी चंडालिया ने जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा को परिवाद देकर आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों ने जानबूझकर तथ्यों को छिपाकर उनके साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी की है। उन्होंने संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। एसपी ने परिवाद पर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।
हाईकोर्ट ने प्रतिवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई के दिए निर्देश
पुलिस की ओर से शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर व्यापारी ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुनील बेनीवाल ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता यदि संबंधित प्राधिकरण को प्रतिवेदन देता है तो प्राधिकरण उसके तथ्यों और शिकायतों पर विचार कर कानून के अनुसार उनका निस्तारण करेगा।