रमेश चंद्र डाड
आकोला|स्मार्ट हलचल|श्रीलक्ष्मीनाथ रामायण मंडल गेगा का खेड़ा द्वारा आयोजित रामलीला के 5 वें दिन मंच पर एक से बढ़कर एक मार्मिक दृश्यों का सजीव मंचन प्रस्तुत किया गया जिसे देख पूरा पंडाल भावविभोर हो उठा और दर्शकों की आँखें छलक पड़ीं। रामलीला की शुरुआत भरत-कैकेयी संवाद से हुई जहाँ माता कैकेयी से श्रीराम के वनवास की बात सुनकर भरत आत्मग्लानि और अपार दुख से भर गये। इसके बाद भरत-कौशल्या संवाद में भरत की निर्मल भक्ति और माता कौशल्या की करुणा ने हर किसी का हृदय पिघला दिया। श्रीराम को पुनः अयोध्या लाने के संकल्प के साथ भरत ने दल-बल सहित चित्रकूट के लिए प्रस्थान किया।
चित्रकूट में जब श्रीराम और भरत का महामिलन हुआ तो ‘श्रीराम-भरत मिलाप’ के उस अत्यंत भावुक क्षण ने सभी को अश्रुधारा बहाने पर मजबूर कर दिया। श्रीराम के अयोध्या न लौटने के दृढ संकल्प पर भरत ने बड़े आदर से प्रभु की चरण-पादुकाएँ माँगीं और अयोध्या लौटकर उन्हें सिंहासन पर स्थापित किया। आगे के मंचन में श्रीराम का अत्रि मुनि के आश्रम आगमन और उनसे पावन मिलन दर्शाया गया। इसके पश्चात शूर्पणखा का लक्ष्मण के पास प्रणय प्रस्ताव लेकर जाना और लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक काटने के दृश्य ने नाटक में नाटकीय मोड़ ला दिया।
सीता हरण से छाया सन्नाटा
लीला के उत्तरार्ध में अग्निदेव द्वारा माता सीता का अग्नि प्रवेश, रावण-मारीच संवाद और कपट रूप धारी रावण द्वारा छल से सीता हरण के दृश्य का इतना जीवंत मंचन किया गया कि पूरा पंडाल स्तब्ध रह गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय और भावुक संवादों ने दर्शकों को आदि से अंत तक बाँधे रखा।