पांसल गांव के होनहार खिलाड़ी ने एक साल की मेहनत में हासिल की बड़ी उपलब्धियां, माता-पिता का सहयोग और कोच अंकित नाथ योगी का मार्गदर्शन बना सफलता की ताकत
भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|कहते हैं कि प्रतिभा किसी परिचय या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। अगर मेहनत करने का जुनून और लक्ष्य हासिल करने का हौसला हो तो सफलता जरूर कदम चूमती है। इसकी मिसाल पांसल गांव के सामान्य परिवार से निकलकर वुशु खेल में अपनी पहचान बना रहे होनहार खिलाड़ी हरिओम माली ने पेश की है। हरिओम ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर गांव, परिवार और जिले का नाम रोशन किया है।
हरिओम माली के पिता का नाम नेमीचंद माली है। सामान्य पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद माता-पिता अपने बेटे के खेल के सपने को पूरा करने के लिए लगातार सहयोग कर रहे हैं। हरिओम पिछले करीब एक साल से कोच अंकित नाथ योगी के मार्गदर्शन में वुशु का प्रशिक्षण ले रहा है। नियमित अभ्यास, अनुशासन और कड़ी मेहनत का परिणाम है कि उसने कम समय में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
मेडलों की लगाई झड़ी, जिला से राज्य तक लहराया परचम
हरिओम ने SGFI प्रतियोगिता में वर्ष 2025 में जिला स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल किया। वर्ष 2026 में भी जिला स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। इसके बाद SGFI राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 2026 में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। जूनियर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 2026 में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। वहीं जूनियर नेशनल प्रतियोगिता 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
अब हरिओम की नजर SGFI की आगामी नेशनल प्रतियोगिता पर है, जिसके लिए वह पूरी मेहनत और तैयारी में जुटा हुआ है।
कोच का मार्गदर्शन और माता-पिता का सहयोग बनी ताकत
कोच अंकित नाथ योगी पिछले एक साल से हरिओम को लगातार प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में हरिओम खेल की बारीकियां सीखने के साथ अपनी तकनीक और प्रदर्शन को लगातार बेहतर बना रहा है। कोच का प्रयास है कि यह प्रतिभाशाली खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाए।
हरिओम की सफलता के पीछे माता-पिता का सहयोग, कोच की मेहनत और खुद खिलाड़ी का निरंतर संघर्ष अहम भूमिका निभा रहा है। हरिओम का सपना भविष्य में देश के लिए मेडल जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाना है।
सामान्य परिवार से निकलकर बड़ी पहचान बनाने की ओर बढ़ते हरिओम माली की कहानी गांव के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। हरिओम ने साबित किया है कि सफलता के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा मजबूत इरादों, सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत की जरूरत होती है।