पांच फीट से सवा 11 फीट तक पहुंचा आस्था का सफर, धनतेरस पर संतों ने प्रज्वलित किया विशाल महादीप

:- 2100 ईंटों, पीली मिट्टी और गोबर से तैयार हुआ दीपक, देवउठनी एकादशी तक अखंड प्रज्वलित रहेगी ज्योत
राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी
स्मार्ट हलचल|कस्बे के श्रीचारभुजानाथ मंदिर परिसर में धनतेरस के पावन अवसर पर आस्था और श्रद्धा का अनूठा नजारा देखने को मिला। संत-महात्माओं के सानिध्य में विशाल मिट्टी के महादीप का विधि-विधान से पूजन कर प्रज्वलन किया गया। दीपक की ज्योत प्रज्वलित होते ही मंदिर परिसर कोटड़ी श्याम के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने महादीप के दर्शन कर परिवार एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

2018 में पांच फीट से शुरू हुई थी परंपरा

श्रीचारभुजानाथ मंदिर परिसर में विशाल महादीप निर्माण की यह अनूठी परंपरा वर्ष 2018 में महज पांच फीट के दीपक से शुरू हुई थी। समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह के चलते इसका आकार लगातार बढ़ता गया और इस वर्ष यह सवा 11 फीट चौड़े विशाल महादीप के रूप में तैयार हुआ। इस बार दीपक के निर्माण में करीब 2100 मिट्टी की ईंटों, एक ट्रॉली पीली मिट्टी और गाय के गोबर का उपयोग किया गया। ग्रामीण महिलाओं ने सामूहिक सहभागिता निभाते हुए मिट्टी और गोबर का लेप लगाकर दीपक को अंतिम स्वरूप प्रदान किया। वहीं पेंटर अनिल पारीक ने आकर्षक चित्रकारी कर इसे विशेष रूप दिया।

अयोध्या की दीप परंपरा से मिली प्रेरणा

आयोजन को लेकर मुख्य महादीप के साथ 21 और 11 इंच के चार अन्य दीपक भी तैयार किए गए। अयोध्या में दीप प्रज्वलन की परंपरा से प्रेरित यह आयोजन अब कोटड़ी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनता जा रहा है। विशाल महादीप में प्रज्वलित की गई अखंड ज्योत देवउठनी एकादशी तक लगातार जलती रहेगी। इस दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।

संतों के सानिध्य में हुआ आयोजन

महादीप प्रज्वलन के अवसर पर सरसड़ी मठ के महंत दीपक पुरी महाराज, नृसिंहद्वारा के जय राजारामदास महाराज, मंदिर पुजारी महावीर पाराशर, श्रीचारभुजा मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष सुदर्शन गाड़ोदिया, श्यामसुंदर चेचाणी, कोटड़ी सरपंच नरपत सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। संतों ने दीप प्रज्वलन के साथ क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और मंगलकामनाओं का आशीर्वाद दिया।

दीपक में तेल डालने की लगी होड़
श्रीचारभुजानाथ मन्दिर प्रांगण में धन तेरस पर प्रज्वलित हुए दीपक में तेल डालने के लिए श्रद्धालु अपने हाथों में तेल की बोतल ले कर पहुचने का शील शिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओ के द्वारा आगामी एकादशी तक दीप प्रज्वलित रखा जाएगा।