जयपुर। स्मार्ट हलचल|जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में वर्षों से लंबित भुगतान अब सरकार के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है। करीब 3000 से अधिक ठेकेदारों ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है—“भुगतान नहीं तो काम नहीं”। 13 अप्रैल से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते प्रदेशभर में जल जीवन मिशन (JJM) के काम ठप पड़ गए हैं और हालात यह हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आमजन को पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
33 महीने का इंतजार, 4500 करोड़ का बकाया: सिस्टम पर सवाल
ठेकेदारों का आरोप है कि पिछले 33 महीनों से ₹3500 करोड़ का भुगतान अटका हुआ है, जबकि करीब ₹1000 करोड़ जीएसटी भी बकाया है। कुल मिलाकर ₹4500 करोड़ का भुगतान रुका हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ठेकेदारों से काम समय पर लिया गया, तो भुगतान में इतनी लंबी देरी क्यों? बार-बार गुहार के बावजूद समाधान नहीं होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मजदूरों का पसीना सूखा, ठेकेदार कर्ज में डूबे
भुगतान अटकने का सीधा असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है। ठेकेदार मजदूरों को मजदूरी नहीं दे पा रहे, वेंडर्स का भुगतान अटका हुआ है और कई ठेकेदार कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।
हालात ऐसे हैं कि जिन लोगों ने गांव-ढाणियों तक पानी पहुंचाया, आज उनके अपने घरों में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
‘मजबूरी में हड़ताल’, 13 अप्रैल से काम पूरी तरह बंद
संघर्ष समिति के नेतृत्व में ठेकेदारों ने 13 अप्रैल से प्रदेशभर में काम बंद कर दिया है। उनका कहना है कि यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि पेट और अस्तित्व की लड़ाई है।
ठेकेदारों ने साफ कहा कि अब बिना भुगतान के एक भी काम नहीं किया जाएगा।
7 दिन की डेडलाइन: नहीं तो पानी सप्लाई पर पड़ेगा असर
ठेकेदारों ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि भुगतान जारी नहीं किया गया तो वे प्रदेश में पानी की सप्लाई को बाधित या बंद करने जैसे कड़े कदम उठाएंगे।
अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर आमजन पर पड़ेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व विभागीय प्रशासन की होगी।
JJM ठप: सरकार की सबसे बड़ी योजना पर संकट
हड़ताल का सबसे बड़ा असर जल जीवन मिशन पर पड़ा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से जल पहुंचाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है।
कार्य बंद होने से नए कनेक्शन, पाइपलाइन और मरम्मत के काम रुक गए हैं, जिससे योजना की गति पूरी तरह थम गई है।
“भीख नहीं, हक चाहिए”
संघर्ष समिति ने दो टूक कहा—
हम भीख नहीं मांग रहे, अपना हक मांग रहे हैं।”
“जब सुनवाई नहीं होती, तो मजबूरी में सख्त कदम उठाने पड़ते हैं।”
3000+ ठेकेदार हड़ताल पर, 13 अप्रैल से काम बंद
33 महीने से ₹4500 करोड़ का भुगतान लंबित
मजदूरों और ठेकेदारों पर आर्थिक संकट
JJM सहित सभी कार्य ठप
7 दिन में समाधान नहीं तो पानी सप्लाई प्रभावित होने की चेतावनी
सरकार की योजनाएं कागजों में तेजी से दौड़ रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि काम करने वालों को ही उनका हक नहीं मिल रहा। अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो इसका खामियाजा पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ सकता है।
