ओम जैन शंभूपुरा।
शंभूपुरा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत खुले में शौच मुक्त अभियान चलाया, इस अभियान की शुरुआत गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2014 को हुई, देशव्यापी इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य 2 अक्टूबर 2019 तक भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाना था, लेकिन चित्तौड़गढ़ जिले की ग्राम पंचायत शंभूपुरा के एक कार्मिक ने तो इसे अपना धंधा बना लिया और जमकर भ्रष्टाचार करते हुए लोगो को सुविधा देने के बजाय लाखों रुपये का सरकारी खजाने को चुना लगाते हुए अपनी जेबें भरना शुरू कर दिया।
गौरतलब है कि वर्ष 2016 से 2019 के बीच ओर विशेषकर वर्ष 2017-18 में शंभूपुरा पंचायत के कर्मचारी मुकेश टेलर द्वारा शौचालय के पेसो के नाम पर खुलकर भ्रष्टाचार किया है। एक सामाजिक कार्यकर्ता और कई ग्रामीणों ने बताया कि मुकेश टेलर शुरू से भ्रष्टाचार में डूबा होकर सरकारी खजाने को चुना लगाता आया है, इसके द्वारा शौचालय अभियान के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, पट्टा बनवाने सहित अन्य कही सरकारी योजनाओं में भी भ्रष्टाचार कर लाखो रुपये से अपनी जेब भरता आया है, संविदा पर लगे इस कर्मचारी को विद्यालय में लगाया गया था लेकिन यह हमेशा से ग्राम पंचायत में ही डेरा डाले रहा क्योकि असली मलाई इसे यहाँ नजर आती थी इसीलिए लाखो रुपये का इतना बड़ा भ्रष्टाचार किया लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह कि क्या इतना बड़ा घोटाला होने के बावजूद किसी को कानो कान खबर तक नही लगी या फिर पूरा खेल मिलीभगत से हुआ यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता ने डिटेल्स मांगी, सचिव ने गुमराह कर, देने से इंकार किया
जानकारी में सामने आया कि कुछ वर्ष पहले ग्राम पंचायत की एक महिला सचिव से एक सामाजिक कार्यकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत इस मामले में सूचना चाही गई लेकिन उसे सचिव द्वारा गुमराह करते हुए सूचना देने से ही इंकार कर दिया, अब कुछ कार्यकर्ता और ग्रामीणों ने मीडिया से रूबरू होकर भ्रष्टाचार के सबूत मीडिया के सामने रखे ताकि ऐसे भ्रटाचारी का पर्दाफाश हो सके।
12 हजार में 2 हजार सामने वाले को 10 अपनी जेब मे
इस अभियान में शौचालय निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा प्रति परिवार ₹12,000 की सहायता राशि प्रदान की जाती है, मुकेश टेलर ने इसमे भी सरकारी नियमो को ताख में रखकर खुलकर भ्रष्टाचार किया और सरकार से 12000 उठाकर 2000 उसके अपात्र लोगो के खाते में रखता बाकी 10 हजार निकलवाकर ले लेता था, ऐसे सेकड़ो लोगो के साथ मिलकर सरकार को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाला यह कर्मचारी बिना डर बिना रोकटोक के घोटाले पर घोटाले करता रहा लेकिन फिर भी इसकी जांच या इसे रोकने वाला कोई नही मिला यह भी एक सोचनीय विषय है।
फर्जीवाड़े की हद, फ़ोटो नाम, पता सब घर बैठकर एडिट
भ्रष्टाचार के इस समुद्र में डूबे मुकेश टेलर ने खुलकर लाखो रुपयों का भ्रष्टाचार किया है, उसने अपने पुत्र की मदद से फ़ोटो नाम पता सब एडिट किया, जिन खातों में पैसे गए हमारे पास उसकी डिटेल्स भी आई जिसमे कुछ अन्य पंचायतों से कुछ अन्य जिले से ओर यहाँ तक कि एमपी के सरासर अपात्र लोगो तक के खाते में शौचालय के 12000 डलवाए जिनको 2000 कमीशन देकर मुकेश बाकी के पैसे निकाल लेता था, यह सिलसिला लम्बा चला और लाखों रुपये का घोटाला हुआ है।
अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में जांच कर भ्रष्टाचारी से वसूली करेगा या यह मामला ऐसे ही कागजो के नीचे दब जाएगा यह तो समय के गर्त में है।
इन्होंने ये कहा
इस तरह का भ्रष्टाचार होना बहुत बड़ा मामला है, ऐसा किसी ने किया तो बक्सा नही जाएगा, कमेटी गठित करवाकर जांच कर सख्त कार्यवाही करेंगे।
-बिनु देवल
उपखण्ड अधिकारी चित्तौड़गढ़।
इस तरह का कोई मामला हुआ है तो बहुत गलत है, हालांकि इस सम्बंध में अभी तक कोई शिकायत तो नही आई थी लेकिन अब संज्ञान में आया तो जांच करवाई जाएगी ओर दोषी होने पर कार्यवाही व रिकवरी करेंगे।
समुन्द्र सिह
विकास अधिकारी
पंचायत समिति चित्तौड़गढ़।
