जहाजपुर में झोलाछापों पर शिकंजे के लिए 22 सितंबर को बना जांच दल, एक सप्ताह बाद भी मौके पर नहीं पहुंचा—विभाग की सुस्ती पर उठे सवाल, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार?
जहाजपुर अलकेश पारीक
जहाजपुर। स्मार्ट हलचल|क्षेत्र में कथित झोलाछापों द्वारा मरीजों का उपचार किए जाने को लेकर प्रकाशित खबर के बाद चिकित्सा विभाग ने भले ही जांच के आदेश जारी कर चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी हो, लेकिन आदेश के एक सप्ताह बाद भी जांच कार्रवाई धरातल पर शुरू नहीं होने का मामला सामने आया है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि विभाग ने जांच कमेटी सिर्फ कागजों में गठित की है या वास्तव में मामले की जांच भी होगी।
दरअसल, कथित झोलाछापों के उपचार को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भीलवाड़ा की ओर से 22 सितंबर 2026 को कार्यालय आदेश जारी किया गया। आदेश में मामले की जांच के लिए डॉ. दिलराज मीणा, उप निदेशक कार्यालय हाजा, डॉ. भागीरथ मीणा, बीसीएमओ जहाजपुर, डॉ. दिलीप मीणा, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी उप जिला चिकित्सालय जहाजपुर तथा औषधि नियंत्रण अधिकारी मनीष कुमार को कमेटी में शामिल किया गया। कमेटी को मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
आदेश हुआ, लेकिन टीम कब पहुंचेगी?
विभाग के आदेश के बाद उम्मीद थी कि टीम मौके पर पहुंचकर कथित झोलाछापों के क्लीनिक, मरीजों को दिए जा रहे उपचार, दवाइयों और संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेजों की जांच करेगी। लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी मौके पर जांच नहीं होने की बात सामने आ रही है।
मामले को लेकर जहाजपुर बीसीएमओ डॉ. भागीरथ मीणा से बातचीत की गई। कमेटी गठित होने की जानकारी तो सामने आई, लेकिन कमेटी द्वारा मौके पर जाकर जांच करने और आगे की कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों की जिंदगी से जुड़ा मामला, फिर भी इंतजार क्यों?
इलाज के नाम पर यदि कोई व्यक्ति बिना आवश्यक योग्यता या वैध अनुमति के मरीजों का उपचार कर रहा है तो यह सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बीमारी की स्थिति में स्थानीय स्तर पर ही उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और समय पर कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
सवाल यह है कि जब विभाग ने शिकायत और प्रकाशित खबर को गंभीर मानते हुए जांच कमेटी बना दी, तो फिर जांच को आगे बढ़ाने में देरी क्यों हो रही है?
भीलवाड़ा में बच्चे की मौत की घटना ने बढ़ाई चिंता
इसी बीच आज भीलवाड़ा जिले में उपचार के दौरान एक बच्चे की मौत की घटना सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित झोलाछापों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। इस घटना के वास्तविक कारणों का निर्धारण जांच से ही होगा, लेकिन ऐसी घटनाओं के बीच जहाजपुर क्षेत्र में कथित झोलाछापों के खिलाफ लंबित जांच को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब विभाग से जवाब मांग रहे ये सवाल
22 सितंबर को गठित जांच कमेटी ने अब तक मौके पर जांच क्यों नहीं की?
कमेटी की जांच रिपोर्ट कब सामने आएगी?
क्षेत्र में उपचार कर रहे कथित झोलाछापों की योग्यता और पंजीयन की जांच कब होगी?
यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कार्रवाई कब होगी?
क्या स्वास्थ्य विभाग किसी गंभीर घटना के बाद ही कार्रवाई करेगा?
जहाजपुर में अब सवाल सिर्फ एक जांच कमेटी का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण मरीजों की सुरक्षा का है जो इलाज के लिए स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। विभाग ने कागज पर कमेटी बनाकर पहला कदम तो उठा दिया, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह कमेटी फाइलों से निकलकर मौके तक कब पहुंचती है।
आदेश की कॉपी भी यही बताती है—जांच होनी थी, अब कार्रवाई का इंतजार
22 सितंबर के आदेश में स्पष्ट रूप से मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को सिर्फ आदेश और कमेटी गठन तक सीमित रखता है या धरातल पर जांच कर जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई भी करता है।