​मिट्टी का वह बेटा, जो जीवन भर अजेय रहा…… .

​ ‘अपराजय’ जननेता स्व. राम सिंह जी चौहान को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।
विशेष लेख – आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ l स्मार्ट हलचल|आक्या की माटी का वह बेटा, जो राजनीति में अजेय रहा, अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी जनसेवा के संकल्प से डिगा नहीं
​​नियति का खेल भी कितना अजीब और बेरहम होता है। चित्तौड़गढ़ के आक्या गांव ने आज एक ऐसी शख्सियत को हमेशा के लिए खो दिया, जिनका नाम ही अजेयता और जिंदादिली का पर्याय था। बीमारी की कठिन चुनौतियों के बावजूद, यदि आज वे हमारे बीच होते, तो निश्चित मानिए कि वे रणक्षेत्र से पीछे नहीं हटते पूरी शिद्दत और जीवटता के साथ चुनाव मैदान में डटे रहते। लेकिन विधाता की पंचायत में कुछ और ही मंजूर था, उधर पंचायत की लाटरी खुली और उसने अपने इस लाडले को हमेशा के लिए अपने पास बुला लिया। आज हम उन्हें चुनाव लड़ते हुए भले ही न देख पाएं, लेकिन उनके द्वारा गढ़ी गई राजनीतिक और सामाजिक लकीरें इतनी गहरी हैं कि उन्हें कभी मिटाया नहीं जा सकता।
​ जिंदादिली केहकहे और बेमिसाल याराना !
​राम सिंह जी से मुलाकातें हमेशा ऊर्जा से भर देती थीं। उम्र का उन्हें मानो कोई फर्क ही नहीं पड़ता था, वे ऐसे जीते थे जैसे आज भी जवान हों । उनके जीवन का फलसफा जिंदादिली और ठहाकों से भरा था। मदन मास्टर के साथ उनकी नोकझोक और हास्य-विनोद की बातें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं जब मदन मास्टर उनसे कहते कि “राम जी, अब तो बाल काले करना छोड़ दो,” तो उनका तुरंत चुटीला जवाब होता, “मदन, बालों की कीमत तुझे क्या पता, तेरे तो बाल ही नहीं हैं!” ऐसे अनगिनत हंसी-ठहाके और जिंदादिल संवाद उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा थे।
​गौ सेवा और जन-सरोकारों से अटूट लगाव !
​बीमार होने के बाद भी उन्होंने गोसेवा और सामाजिक दायित्वों में कभी कोई कमी नहीं आने दी। जब भी समय मिलता, वे दिन हो या रात, गौशाला पहुंच जाते थे और पूरी निष्ठा से सेवा कार्य संभालते थे। स्थानीय स्तर पर नेतृत्व और जन-जन से जुड़ाव ही राम सिंह जी चौहान की सबसे बड़ी ताकत थी। ग्रामीण विकास, किसानों के अधिकार और क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी समस्या पर उनकी मजबूत पकड़ ने उन्हें लगातार जीत दिलाई। आक्या और आसपास के पूरे आंचल में सामाजिक सरोकारों के लिए उनका सक्रिय योगदान सर्वविदित है। वे केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि हर उस व्यक्ति की आवाज थे जिसे सहारे की जरूरत थी। यही वजह थी कि जनता ने उन्हें केवल अपना जनप्रतिनिधि नहीं माना, बल्कि हर चुनाव में उन्हें प्यार के साथ ‘अपराजय’ होने का आशीर्वाद दिया।
​ संस्कारों से सींची गई मजबूत राजनीतिक विरासत !
​एक सशक्त नेता की असली पहचान तब होती है जब वह अपने पीछे विचारों और संस्कारों की ऐसी विरासत छोड़ जाए जो समय के साथ और मजबूत हो। राम सिंह जी द्वारा रोपा गया सेवा का यह पौधा आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और जनसेवा के मूल्य परिवार की अगली पीढ़ी में बखूबी रचे-बसे हैं। उनके सुपुत्र, चित्तौड़गढ़ के लोकप्रिय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, जिन्होंने वर्ष 2005 में पंचायत समिति सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक सफर की नींव रखी थी, आज उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
​पिता के मार्गदर्शन में राजनीति के दो दशक से अधिक का लंबा सफर तय करने के बाद, आज बेटा अपने राजनीतिक जीवन के उस पड़ाव पर है जहां वह अपने अनुभव को पंचायत और क्षेत्र की सेवा में समर्पित कर रहा है। गर्व की बात तो तब होंगी जब परिवार की तीसरी पीढ़ी यानी उनका पौत्र दादा के इस इतिहास और जनसेवा के रास्ते को दोहराने का बीड़ा उठा ले l
​एक युग का अंत, पर विचार अमर हैं !
​राम सिंह जी चौहान साहब का भौतिक शरीर भले ही आज पंचतत्व में विलीन हो रहा हो, लेकिन आक्या क्षेत्र की हवाओं में, यहां की राजनीति के कण-कण में और जन-जन की स्मृतियों में उनका अजेय प्रभाव हमेशा अमर रहेगा। उन्होंने अपने जीवन को सामाजिक और राजनीतिक सेवा को ऐसी मिसाल बनाया, जो आने वाली कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
​शत-शत नमन ऐसी अपराजय और जुझारू शख्सियत को !
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राम सिंह जी चौहान का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सत्ता पदों से नहीं, जनता के दिलों में जगह बनाने से मिलती है। आक्या की माटी अपने इस सपूत को हमेशा याद रखेगी।।