मेरठ कैंट में ड्यूटी के दौरान हृदयाघात से हुआ निधन, लाड़ाकाबास में हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
पावटा,स्मार्ट हलचल|ग्राम लाड़ाकाबास निवासी भारतीय सेना के नायब सूबेदार बनवारी लाल खोजा को मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। मेरठ कैंट में ड्यूटी के दौरान हृदयाघात से उनका निधन होने के बाद मंगलवार सुबह उनका पार्थिव शरीर पावटा के राजकीय उप जिला अस्पताल पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सुबह करीब 8 बजे तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को अंतिम यात्रा के रूप में पैतृक गांव लाड़ाकाबास के लिए रवाना किया गया। करीब पांच किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा में हजारों ग्रामीण, पूर्व सैनिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और आमजन शामिल हुए। पूरे मार्ग पर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “शहीद बनवारी लाल खोजा अमर रहें” के गगनभेदी नारों से वातावरण देशभक्ति से सराबोर रहा। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर वीर सपूत को अंतिम नमन किया। गांव लाड़ाकाबास पहुंचने पर सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया। राजकीय सम्मान के बीच सैन्य परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ। इस भावुक क्षण में हर आंख नम दिखाई दी। नायब सूबेदार बनवारी लाल खोजा अपने पीछे पत्नी संतरा देवी, एक पुत्र और एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी पुत्री दीपा का विवाह करीब दो माह पूर्व ही हुआ था। परिजनों ने बताया कि निधन से दो दिन पहले उन्होंने पत्नी से फोन पर बातचीत कर जल्द घर आने का भरोसा दिया था तथा परिवार की कुशलक्षेम, बाजरे की फसल और क्षेत्र में हुई बारिश की जानकारी ली थी। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह उनकी अंतिम बातचीत होगी। विराटनगर विधायक कुलदीप धनकड़ भी लाड़ाकाबास पहुंचकर वीर जवान को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि नायब सूबेदार बनवारी लाल खोजा ने मातृभूमि की सेवा करते हुए अपने जीवन को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। उनका त्याग और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। विधायक ने शोक संतप्त परिवार के और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर युवाओं में देशसेवा की भावना विकसित करनी चाहिए। लाड़ाकाबास के प्रशासक मदन यादव ने कहा कि गांव ने अपना एक वीर बेटा खो दिया है। उन्होंने कहा कि बनवारी लाल खोजा का नाम सदैव सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा। गांववासियों को उनके शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम पर हमेशा गर्व रहेगा तथा उनकी स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति का संदेश देती रहेंगी। अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए आसपास के अनेक गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल रहा और हर जुबान पर यही शब्द थे— “वीर जवान अमर रहें, भारत माता की जय।”
