धर्मशाला में कथित अवैध तोड़फोड़ और निर्माण को लेकर बवाल, नागरिकों ने नगर पालिका से की तत्काल कार्रवाई की मांग

एजाज़ अहमद उस्मानी

स्मार्ट हलचल।मेड़तारोड के सदर बाजार स्थित सुगनचंद केदारनाथ डागा धर्मशाला में कथित रूप से बिना अनुमति चल रही तोड़फोड़ एवं निर्माण गतिविधियों को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामले को गंभीर बताते हुए नागरिकों ने नगर पालिका मंडल मेड़तारोड के अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा नगर पालिका की स्वीकृति के बिना धर्मशाला परिसर में प्रवेश कर तोड़फोड़ एवं निर्माण कार्य किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यह गतिविधि न केवल धर्मशाला की संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि भविष्य में किसी बड़े विवाद का कारण भी बन सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाने और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
नागरिकों ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि धर्मशाला के निकट स्थित मकरध्वज भगवान मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वर्तमान में चल रही कथित निर्माण गतिविधियों के कारण मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते क्षेत्र के लोगों में भी रोष व्याप्त है और वे प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि धर्मशाला की संपत्ति एवं स्वामित्व से जुड़े सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार के अनधिकृत कब्जे, स्वामित्व विवाद अथवा कानूनी जटिलताओं की स्थिति उत्पन्न न हो। नागरिकों का कहना है कि धर्मशालाएं सामाजिक एवं धार्मिक उपयोग की सार्वजनिक संपत्तियां होती हैं, जिनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्रवासी लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे। उन्होंने कहा कि धर्मशाला जैसी ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की संपत्ति के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बीच, ज्ञापन प्राप्त होने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
वहीं, इस पूरे मामले में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा मेड़ता रोड पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि धर्मशाला में तोड़फोड़ करने वाले व्यक्तियों को कथित रूप से संरक्षण दिया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व सरपंच रामनिवास लटियाल, कांग्रेस नेता ओमप्रकाश शर्मा तथा रामेश्वर गहलोत ने इस मामले में प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें नगर पालिका और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

*इनका कहना है*

मेड़ता रोड धर्मशाला के मामले को लेकर पुलिस का कोई हस्तक्षेप नहीं है, जो व्यक्ति धर्मशाला की साफ सफाई और मरम्मत का कार्य कर रहे हैं उनके पास सभी दस्तावेज हैं। इस पर अपना नगरपालिका प्रशासन कार्यवाही करेगी। इसमें मेड़ता रोड पुलिस का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
*दयानंद शर्मा थाना अधिकारी मेड़ता रोड*

धर्मशाला मामले को लेकर धर्मशाला में प्रवेश करने वाले लोगों को पुलिस ने नहीं रोका और नहीं उनको बाहर निकाला। इस बात से साफ जाहिर होता है कि पुलिस ने धर्मशाला में प्रवेश का तोड़फोड़ करने वाले लोगों का साथ दिया है। मेड़ता रोड पुलिस नेदोहरा रवैया अपनाया है।
*रामनिवास लटियाल, पूर्व सरपंच मेड़ता रोड*

मेड़ता रोड धर्मशाला काफी समय से खली और जर्जर पड़ी हुई थी जिसको लेकर नगरपालिका ने एक बार वहां पर बोर्ड भी लगाया था। लेकिन ग्रामीणों ने उसे बोर्ड को वहां से हटवा दिया इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि जिसके पास इसके दस्तावेज होंगे उसको सौंप दी जाएगी लेकिन दस्तावेज अभी तक किसी ने पेश नहीं किए हैं। फिलहाल ग्रामीण योजना धर्मशाला को लेकर नगर पालिका को एक ज्ञापन प्रस्तुत किया है जिसको लेकर नगर पालिका जांच करने के बाद जो भी उचित निर्णय होगा लिया जाएगा।
*हरेंद्र चौधरी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका मेड़ता रोड*