महेन्द्र नागौरी
भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|क्या जिले के उपखंड स्तर के थानों में आमजन की शिकायतों की सुनवाई प्रभावी ढंग से नहीं हो रही…? क्या इसी वजह से बड़ी संख्या में फरियादी जिला पुलिस मुख्यालय पहुंच रहे हैं…? इन सवालों की चर्चा इन दिनों पुलिस महकमे के साथ आम लोगों के बीच भी तेज है। जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रतिदिन शिकायतकर्ताओं की बढ़ती भीड़ स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रही है।
सूत्रों के अनुसार जमीन विवाद, मारपीट, धोखाधड़ी, महिला उत्पीड़न, साइबर अपराध और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में परिवादी स्थानीय थानों से निराश होकर सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि थानों के बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं होने से उन्हें जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिले में नए पुलिस अधीक्षक संजय राणा के पदभार संभालने के बाद अब लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। क्या नए एसपी थानों की कार्यप्रणाली में कसावट लाएंगे…? क्या लंबित शिकायतों के निस्तारण के लिए जवाबदेही तय होगी…? क्या फरियादियों को जिला मुख्यालय आने की बजाय स्थानीय स्तर पर ही न्याय मिलेगा…? ऐसे कई सवाल अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।
पुलिस मुख्यालय में बढ़ती भीड़ यह संकेत भी दे रही है कि अधीनस्थ स्तर पर शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नए एसपी संजय राणा पुलिसिंग में क्या बदलाव लाते हैं और आमजन का भरोसा थानों पर दोबारा कैसे मजबूत करते हैं।
चर्चा के केंद्र में उठ रहे सवाल…
क्या थानों में शिकायतों की सुनवाई समय पर हो रही है…?
क्या परिवादियों को अनावश्यक रूप से जिला मुख्यालय भेजा जा रहा है…?
क्या नए एसपी शिकायत निस्तारण की नई व्यवस्था लागू करेंगे…?
क्या आमजन को अब थानों पर ही त्वरित राहत मिल पाएगी…?
