अरुणाचल के गृहमंत्री मामा नटुंग ने ग्लोबल समिट में दिया आध्यात्मिक नेतृत्व का संदेश

ब्रह्माकुमारीज के 90 वर्ष के आध्यात्मिक सफर पर माउंट आबू में आयोजन, करुणा, नैतिकता और आंतरिक ज्ञान को बताया प्रबुद्ध नेतृत्व की बुनियाद

माउंट आबू। स्मार्ट हलचल|राजस्थान के माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज के विश्व मुख्यालय शांतिवन परिसर में 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित ग्लोबल समिट-2026 में अरुणाचल प्रदेश के गृहमंत्री मामा नटुंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। डायमंड हॉल में आयोजित सम्मेलन के पूर्ण सत्र में “विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागृति” विषय पर विचार-विमर्श हुआ। ब्रह्माकुमारीज की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा को समर्पित इस आयोजन में आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिक नेतृत्व, आंतरिक शांति और मानवीय सद्भाव के महत्व पर जोर दिया गया।

समिट में अपने विचार साझा करते हुए मामा नटुंग ने कहा कि करुणा, नैतिकता, ईमानदारी और आंतरिक ज्ञान प्रबुद्ध नेतृत्व की आधारशिला हैं। वर्तमान दौर में दुनिया तेजी से डिजिटल तकनीक, आधुनिक संचार और नई चुनौतियों के बीच आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में नेतृत्व की सार्थकता केवल प्रशासनिक दक्षता और विकास के लक्ष्यों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसमें मानवीय संवेदनाओं, नैतिक जिम्मेदारी और समाज के प्रति प्रतिबद्धता भी जरूरी है।

उन्होंने आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन और नेतृत्व से जोड़ने की आवश्यकता पर विचार रखते हुए कहा कि व्यक्ति के भीतर शांति, संतुलन और सकारात्मक सोच का विकास समाज में बेहतर वातावरण बनाने में योगदान दे सकता है। जब नेतृत्व में संवेदनशीलता और नैतिकता को प्राथमिकता दी जाती है, तब निर्णयों में मानवीय पक्ष को भी उचित महत्व मिलता है।

तकनीकी युग में आध्यात्मिक मूल्यों की प्रासंगिकता

आज का विश्व विज्ञान, तकनीक और डिजिटल क्रांति के कारण तेजी से बदल रहा है। लोगों के जीवन में सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन सामाजिक तनाव, आपसी अविश्वास और मानवीय संबंधों में बढ़ती दूरी जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। ऐसे परिवेश में आध्यात्मिकता को आत्मचिंतन, आत्मानुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का माध्यम माना जा सकता है।

मामा नटुंग ने अपने संबोधन में करुणा, नैतिकता और ईमानदारी को नेतृत्व के आवश्यक गुणों के रूप में रेखांकित किया। उनका संदेश इस विचार पर केंद्रित रहा कि तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय मूल्यों का संरक्षण भी जरूरी है। किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति में आर्थिक और तकनीकी विकास के साथ सामाजिक सद्भाव, संवेदनशीलता और नैतिक जिम्मेदारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

राजयोग से आंतरिक शांति और सकारात्मकता का संदेश

ब्रह्माकुमारीज की शिक्षाओं में राजयोग ध्यान को विशेष स्थान दिया गया है। राजयोग का उद्देश्य आत्मचिंतन, मन की एकाग्रता और आंतरिक शांति के अभ्यास के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता विकसित करना है। सम्मेलन में भी आध्यात्मिक मूल्यों और राजयोग की शिक्षाओं को अधिक शांतिपूर्ण तथा संवेदनशील समाज के निर्माण से जोड़कर देखा गया।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार, जब व्यक्ति अपने विचारों और व्यवहार में संतुलन विकसित करता है, तो उसका प्रभाव उसके परिवार, कार्यस्थल और सामाजिक जीवन पर भी पड़ सकता है। इसी तरह नेतृत्व में धैर्य, ईमानदारी, करुणा और नैतिकता का समावेश निर्णय प्रक्रिया को अधिक मानवीय बनाने में सहायक हो सकता है।

ब्रह्माकुमारीज के 90 वर्ष की आध्यात्मिक यात्रा

ग्लोबल समिट-2026 का आयोजन ब्रह्माकुमारीज की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा के संदर्भ में किया गया। राजस्थान के माउंट आबू स्थित शांतिवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक जागृति और विश्व नवीनीकरण के विचार को प्रमुखता दी गई। सम्मेलन का विषय व्यक्तिगत परिवर्तन से लेकर व्यापक सामाजिक सद्भाव तक आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करता है।

इस प्रकार के सम्मेलनों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों और आध्यात्मिक नेतृत्व को एक साझा मंच पर लाकर शांति, नैतिकता और मानवीय एकता जैसे विषयों पर संवाद को बढ़ावा देना है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में इन विषयों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

विश्व शांति और मानवीय एकता का संदेश

समिट का मूल संदेश रहा कि विश्व में स्थायी शांति और सकारात्मक परिवर्तन के लिए बाहरी विकास के साथ आंतरिक जागृति भी आवश्यक है। करुणा, ईमानदारी, नैतिकता और आत्मज्ञान जैसे मूल्य व्यक्ति को जिम्मेदार व्यवहार की प्रेरणा दे सकते हैं। इन मूल्यों को सामाजिक जीवन और नेतृत्व में अपनाने से आपसी विश्वास, सहयोग और सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।

अरुणाचल प्रदेश के गृहमंत्री मामा नटुंग की इस सम्मेलन में भागीदारी के दौरान साझा किए गए विचारों ने आध्यात्मिकता और नेतृत्व के बीच संबंध को रेखांकित किया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि तकनीक और आधुनिकता से आगे बढ़ती दुनिया में मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों को साथ लेकर चलना जरूरी है।