बूंदी- स्मार्ट हलचल।राजस्थान के जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा ‘लाखेरी’ आज अपनी पहचान और वजूद की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है. एशिया की सबसे पहली सीमेंट फैक्ट्री, जिसने साल 1912-13 में अपनी नींव रखी थी और जहां 1917 से देश के निर्माण के लिए सीमेंट का उत्पादन शुरू हुआ था, आज पूरी तरह खामोश हो चुकी है. बीते दो महीनों से इस फैक्ट्री में उत्पादन पूरी तरह से बंद है।
करीब 113 साल के गौरवशाली इतिहास को समेटे इस प्लांट के बंद होने से न केवल लाखेरी बल्कि पूरे बूंदी जिले में हड़कंप मच गया है. जो फैक्ट्री कभी एसोसिएट सीमेंट कंपनी (ACC) के अधीन देश की धड़कन हुआ करती थी, उसका करीब 4 साल पहले अडानी ग्रुप ने टेकओवर किया था. टेकओवर के बाद उत्पादन जारी था, लेकिन अचानक दो महीने पहले इसके पहिये थम गए. अब स्थिति यह है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस फैक्ट्री पर निर्भर करीब 20,000 लोगों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है।
ठप हुई लाखेरी कस्बे की अर्थव्यवस्था पर अब कांग्रेस- भाजपा नेताओं ने शुरू किया आंदोलन।
पूर्व विधायक और भाजपा नेता चंद्रकांता मेघवाल का कहना है कि मैनेजमेंट की बहुत बड़ी खामी रही है, इसके चलते 2 महीने से उत्पादन सीमेंट फैक्ट्री में बंद है.चंद्रकांता मेघवाल ने सीधे तौर पर ग्रुप के स्थानीय मैनेजमेंट की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा यह फैक्ट्री प्रबंधन की बहुत बड़ी प्रशासनिक खामी और हठधर्मिता है. यह उनका कोई निजी खिलौना नहीं है जिसे जब चाहे शुरू कर दें और जब चाहे बंद कर दें. लाखेरी के लोगों का इस फैक्ट्री के साथ मां-बेटे का रिश्ता है. यह यहां की जीवनदायिनी है. पिछले 50 सालों में इसी प्लांट ने कंपनी को अरबों रुपये का मुनाफा कमा कर दिया है, आज अगर थोड़ा नफा-नुकसान हो भी रहा है, तो इस तरह अचानक ताला नहीं जड़ा जा सकता. मेघवाल ने फैक्ट्री प्रबंधन को नसीहत दी है कि वे अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत जनप्रतिनिधियों के साथ टेबल पर बैठें, संवाद करें और जो भी तकनीकी या वित्तीय समस्या है, उसे राज्य और केंद्र सरकार के सामने रखें ताकि इसका कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।
बूंदी जिले के लाखेरी कस्बे में करीब 100 साल से भी ज्यादा समय से उत्पादन कर रही फैक्ट्री से प्रोडक्शन बंद होने पर जिले में हड़कंप मच गया है। फैक्ट्री प्रबंधन सीधे तौर पर कुछ भी नहीं कर रहा है। हालांकि प्रोडक्शन बंद होने की बात स्वीकार रहे हैं. दूसरी तरफ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं. फैक्ट्री में काम कर रहे करीब 1 हजार के आसपास कार्मिक और मजदूरों में रोजगार का संकट छा गया है. इस सीमेंट फैक्ट्री से करीब 3000 के आसपास परिवारों का रोजगार चल रहा था. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20000 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं. दूसरी तरफ लाखेरी कस्बे की पूरी अर्थव्यवस्था इसी फैक्ट्री के दम पर चल रही है. 100 साल पुरानी इस धरोहर और रोजगार के साधन को छिनता देख बूंदी जिले की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल मैदान में उतर आए हैं और एक-दूसरे के साथ-साथ फैक्ट्री प्रबंधन को भी आड़े हाथों ले रहे हैं।
कांग्रेस द्वारा एक जून को कलेक्ट्रेट पर किया जाएगा विरोध प्रदर्शन।
बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने इस फैक्ट्री को चालू रखने की मांग की है, उनका कहना है की फैक्ट्री बूंदी जिले की शान रही है. इसे बंद होने के चलते पूरे जिले की छवि खराब होगी, यहां तक की रोजगार का भी संकट लोगों पर हो जाएगा. वहीं केशोरायपाटन से कांग्रेस विधायक सीएल प्रेमी ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि 1 जून से कलेक्ट्रेट पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा. इस आंदोलन में उनके साथ पूर्व मंत्री व हिंडोली विधायक अशोक चांदना और बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा भी शामिल रहेंगे. सीएल प्रेमी ने लोकसभा अध्यक्ष और स्थानीय सांसद ओम बिरला से भी इस गंभीर मामले में सकारात्मक रुख अपनाते हुए तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है.