बजरी माफियाओं के हौसले बुलंद: मालीखेड़ा, बिगोद, मोई, प्रतापपुरा और जालिया में दिन-रात अवैध खनन के आरोप

बजरी माफियाओं के हौसले बुलंद: मालीखेड़ा, बिगोद, मोई, प्रतापपुरा और जालिया में दिन-रात अवैध खनन के आरोप

सुबह 4 बजे से 10 बजे तक और शाम 6 बजे से देर रात तक जेसीबी से नदी में खनन का दावा, फर्जी रवन्नों के जरिए बजरी परिवहन के आरोप; ग्रामीणों ने प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

भीलवाड़ा, स्मार्ट हलचल। जिले के मालीखेड़ा, बिगोद, मोई, प्रतापपुरा और जालिया क्षेत्र में बजरी के कथित अवैध खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इन क्षेत्रों में जेसीबी मशीनों की मदद से नदी से बड़े पैमाने पर बजरी निकाली जा रही है और संबंधित विभागों की कार्रवाई का कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यह गतिविधि लंबे समय से जारी है, जिससे पर्यावरण, नदी तंत्र और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

ग्रामीणों के अनुसार मालीखेड़ा क्षेत्र में प्रतिदिन सुबह लगभग 4 बजे से 10 बजे तक तथा शाम 6 बजे से देर रात तक खनन गतिविधियां संचालित होती हैं। उनका दावा है कि इस दौरान जेसीबी मशीनों से नदी से बजरी निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों एवं डंपरों में भरी जाती है, जिसे बाद में विभिन्न स्थानों पर भेज दिया जाता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई वाहन फर्जी अथवा संदिग्ध रवन्नों (ट्रांजिट पास) के आधार पर बजरी का परिवहन करते हैं। उनका कहना है कि मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद वाहनों को वैध रवन्ने दिखाकर आगे रवाना किया जाता है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह खनिज नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का गंभीर मामला हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की स्थिति खराब होती जा रही है। धूल, प्रदूषण और शोर के कारण आसपास के गांवों के लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं नदी से लगातार बजरी निकाले जाने के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने तथा भविष्य में जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो अवैध खनन का दायरा और बढ़ सकता है। उन्होंने मांग की है कि खनन विभाग, जिला प्रशासन एवं पुलिस की संयुक्त टीम विशेष अभियान चलाकर कथित अवैध खनन स्थलों पर कार्रवाई करे, जेसीबी मशीनों और संबंधित वाहनों की जांच करे, आवश्यक होने पर उन्हें जब्त करे तथा रवन्नों की गहन जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जिन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में लगातार अवैध खनन के आरोप सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए तथा आवश्यकतानुसार जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

नोट: इस संबंध में प्रशासन अथवा खनन विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।