सांवर मल शर्मा
आसींद । आसींद क्षेत्र के बरनाघर स्थित बैकुंठ धाम में आयोजित 51 कुंडीय विष्णु महायज्ञ के दौरान जहां भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला, वहीं राजस्थान की लुप्त होती लोक संस्कृति की भी सुंदर झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में पारंपरिक वाद्य यंत्र मशक बाजा की मधुर धुनों ने सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आधुनिक दौर में नए-नए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स के आने से प्राचीन वाद्य यंत्र धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं। ऐसे में भीलवाड़ा क्षेत्र का यह पारंपरिक वाद्य मशक बाजा अब खत्म होने की कगार पर है। कभी राजा-महाराजाओं के दरबारों और शाही आयोजनों की शान रहा यह वाद्य आज बहुत कम देखने को मिलता है।
महायज्ञ आयोजन समिति एवं मंदिर ट्रस्ट द्वारा इस वाद्य यंत्र को विशेष स्थान देकर न केवल कलाकारों को मंच प्रदान किया गया, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य कलाकार रामनारायण सैनी और सोजीलाल सैनी ने अपनी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। उनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को राजस्थान की पारंपरिक लोक संस्कृति की याद दिला दी।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सांस्कृतिक धरोहरों को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
