चित्तौड़गढ़ की नगर परिषद Ai के माध्यम से संचालित होंगी….?
मुकेश्या नंद महाराज……………..
एक बेबाक राजनीतिक व्यंग्य # 13— आकाश शर्मा
स्मार्ट हलचल|
चित्तौड़गढ़ नगर निकाय चुनाव के नतीजे कई मायनों में बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर 33 सीटों पर भले ही अपना कब्जा जमा लिया हो और सभापति की कुर्सी पर बैठने की पूरी तैयारी कर ली हो, लेकिन अंदरखाने की हलचल कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
हमारे सूत्रों ने आधी रात को जो चौंकाने वाली जानकारी दी, उसने असमंजस में डाल दिया। अब सवाल यह था कि बिना जांच-पड़ताल के कोई अहम खबर कैसे लिख दें? और रात के वक्त फोन आखिर किसे किया जाए? आखिरकार, थक-हार कर हमने ‘बाबाजी’ को याद कर लिया।
और यह क्या! बाबाजी मानो पहले से ही जानते थे कि भक्त उन्हें याद करने वाला है। फोन लगते ही बाबाजी बोले, “क्या हुआ वत्स…?”
हमने भी बिना वक्त गंवाए अपने शब्द रूपी तीर तरकश से निकाले और पूछना शुरू कर दिया— “बाबाजी! पान का बीड़ा, काला चश्मा… और सभापति की कुर्सी…?”
बाबाजी सब कुछ झट से समझ गए और मुसकुराते हुए बोले, “वत्स… सब कुछ पहले से ही सेट है। बस, राजनीति के बाजार की आबोहवा में उड़ती खबरें कुछ और ही इशारा कर रही हैं।”
चर्चाओं का बाजार गर्म है और असंतोष की सुगबुगाहट भी दबी जुबान से सुनाई दे रही है। ऐसे में उपनगरीय क्षेत्र चंदेरिया से उठी एक पुरजोर आवाज ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चंदेरिया का आमजन अब खुलकर कह रहा है— “हमने भाजपा को जिताया है, तो इसका फल क्षेत्र की जनता को ‘उपसभापति’ के रूप में मिलना ही चाहिए।”
चंदेरिया से बस एक ही गूंज सुनाई दे रही है— दिनेश गवारिया… दिनेश गवारिया…
याद कीजिए, चुनाव प्रचार के दौरान विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने वहां की जनता से वादा किया था कि बोर्ड गठन में चंदेरिया को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। अब देखना यह है कि यह वादा निभा-कर धरातल पर उतरेगा या फिर महज़ एक राजनीतिक जुमला बनकर रह जाएगा?
हमने फिर बाबाजी से सवाल दागा, “बाबाजी, आखिरकार सभापति की कुर्सी पर बैठेगा कौन?”
बाबाजी ने रहस्यमयी अंदाज में जवाब दिया, “वत्स! आने वाले समय में चित्तौड़गढ़ की नगर परिषद किसी इंसानी फैसले से नहीं, बल्कि ऐसा लगता है मानो ‘AI’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के माध्यम से संचालित होगी… सब कुछ पहले से प्रोग्राम्ड दिखाई दे रहा है।”
हमने चिंता जताते हुए कहा, “बाबाजी, अगर ऐसा हुआ तो पार्टी के भीतर भयंकर असंतोष बढ़ जाएगा!”
बाबाजी ने इत्मीनान से जवाब दिया, ” बेटा… राजनीति में यह असंतोष कुछ पल का ही होता है, बाद में सब कुछ अपनी पटरी पर लौट आता है और सामान्य हो जाता है…!