भक्तामर स्तोत्र आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का अक्षय स्रोत : युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी

रविवार को शांतिभवन में होगा युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी का चातुर्मास मंगलप्रवेश

भीलवाड़ा // भक्तामर स्तोत्र की ध्वनि-तरंगें सकारात्मक ऊर्जा का आभामंडल निर्मित कर व्यक्ति की रचनात्मक शक्तियों को जागृत करती हैं। यह बात श्रमण संघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी महाराज ने वर्धमान कॉलोनी स्थित अम्बेश स्वाध्याय भवन में आयोजित भक्तामर स्तोत्र के सामूहिक जाप के दौरान उस पर हुए शोधों का उल्लेख करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इसकी प्रत्येक गाथा से उत्पन्न ध्वनि-स्पंदन सकारात्मक चेतना और आत्मबल को सुदृढ़ करते हुए नकारात्मक प्रवृत्तियों को क्षीण करने में सहायक होते हैं।
उन्होंने कहा कि आचार्य मानतुंग विरचित भक्तामर स्तोत्र, जिसे आदिनाथ स्तोत्र भी कहा जाता है, जैन वाङ्मय की कालजयी कृति है। यह केवल आराधना का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के विविध आयामों का समग्र साधना-सूत्र है। स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, पारिवारिक मंगल,आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नयन जैसे अनेक जीवनोपयोगी तत्व इसमें समाहित हैं। प्रत्येक गाथा का अपना महत्व है, किंतु सम्पूर्ण स्तोत्र का सामूहिक पाठ अधिक व्यापक आध्यात्मिक प्रभाव उत्पन्न करता है।
युवाचार्यश्री ने कहा कि भक्तामर स्तोत्र वसंततिलका छंद में रचित है। इसकी लय, स्वर-विन्यास और शब्द-संरचना साधक के मन एवं चेतना पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। पुणे चातुर्मास के दौरान भक्तामर पर शोध करने वाले एक शोधकर्ता से हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक गाथा से उत्पन्न ध्वनि-तरंगें सकारात्मक आभामंडल के निर्माण में सहायक होती हैं। इन स्पंदनों से व्यक्ति की सकारात्मक वृत्तियाँ सशक्त होती हैं तथा नकारात्मक प्रवृत्तियाँ स्वतः क्षीण होने लगती हैं।
उन्होंने कहा कि भक्तामर स्तोत्र की महिमा किसी एक परंपरा तक सीमित नहीं है। दिगंबर, श्वेतांबर, मूर्तिपूजक, स्थानकवासी और तेरापंथ सहित सम्पूर्ण जैन परंपरा में इसे समान श्रद्धा और आस्था के साथ पाठ किया जाता है। विभिन्न परंपराओं में गाथाओं की संख्या भिन्न हो सकती है, किंतु इसकी आध्यात्मिक प्रभावशीलता और स्वीकार्यता सर्वमान्य है।
युवाचार्यश्री ने श्रद्धालुओं से भक्तामर स्तोत्र का नियमित एवं शुद्ध उच्चारण के साथ अभ्यास करने का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत कठिन नहीं, अभ्यास की भाषा है। निरंतर अभ्यास से उच्चारण सहज हो जाता है और तभी स्तोत्र की भाव-शक्ति तथा आध्यात्मिक अनुभूति का वास्तविक लाभ प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि स्वाध्याय और आराधना का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर संयम, सकारात्मक दृष्टि, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक संस्कारों का विकास करना है। भक्तामर स्तोत्र इसी आत्मपरिष्कार की सशक्त साधना है, जो व्यक्ति को भीतर से सुदृढ़ बनाती है।
भक्तामर स्तोत्र के सामूहिक जाप में अम्बेश स्वाध्याय भवन के अध्यक्ष नवरतन सूरिया, मुकेश आंचलिया, राजेन्द्र मेहता, सुरेश नानेचा, पंकज पीपड़ा, पुष्पेन्द्र सुराणा, सुधीर खाब्या ,जयप्रकाश आंचलिया,सहित चंदनबाला महिला मंडल की अध्यक्षा मंजू खटवड़ तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाई-बहनों ने सहभागिता की।

शांतिभवन के मंत्री नवरतनमल भलावत ने बताया कि श्रमण संघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी सहित संतवृंद एवं साध्वीवृंद का चातुर्मास मंगलप्रवेश रविवार प्रातः 7:30 बजे वर्धमान कॉलोनी स्थित अम्बेश स्वाध्याय भवन से भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारंभ होगा। शोभायात्रा माणिक्य नगर, महाराणा टॉकीज, नेताजी सुभाष मार्केट सहित विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए शांतिभवन पहुंचेगी, जहां चातुर्मास मंगलप्रवेश के उपरांत आयोजित समारोह में युवाचार्यश्री का अभिनंदन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चातुर्मास मंगलप्रवेश एवं अभिनंदन समारोह में देश के विभिन्न प्रांतों से सैकड़ों श्रद्धालु सहभागी होंगे।