पुनित चपलोत
भीलवाड़ा // भीषण गर्मी की तपिश और आसमान से बरसती आग… जब इंसान एक-एक बूंद पानी और चंद पलों की छांव के लिए तरस रहा हो, ऐसे में अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो सवाल उठना लाज़िमी है। मामला भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन का है, जहां पर्यावरण संरक्षण के सरकारी दावों की धज्जियां उड़ती नजर आईं।
भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन परिसर में सोमवार को वर्षों पुराने नीम और पीपल के विशाल पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। आरोप है कि यह सब रेलवे के एईएन शैलेश कुमार के इशारे पर हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के नाम पर उन पेड़ों की बलि दे दी गई, जो न तो रेलवे ट्रैक में बाधा थे और न ही किसी सड़क के बीच में खड़े थे। हैरानी की बात यह है कि पेड़ काटने के बाद लकड़ियों को गुपचुप तरीके से पिकअप वाहन में भरकर ठिकाने लगा दिया गया। जब इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए फोन ही काट दिया। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नियम-कायदे सिर्फ आम जनता के लिए हैं? नीम और पीपल जैसे पूजनीय और ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों को बिना अनुमति काटने का अधिकार आखिर किसने दिया? मौके पर मौजूद देवराज गुर्जर ने बताया कि रेलवे स्टेशन परिसर में ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के लिए रेलवे के एईएन शैलेश कुमार के कहने पर पेड़ काटे जा रहे थे।
रेलवे कॉलोनी के स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलोनी स्थित एक खाली प्लॉट में लगे इन पेड़ों को बिना किसी स्पष्ट कारण के कटवा दिया गया। ये पेड़ न तो सड़क निर्माण में बाधा बन रहे थे और न ही रेलवे ट्रैक के बीच में थे, इसके बावजूद विभाग ने इन्हें हटवा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कटे हुए पेड़ों की लकड़ियों को बाद में एक पिकअप वाहन में भरकर परिसर से बाहर भेज दिया गया। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जब इस मामले को लेकर रेलवे के एईएन शैलेश कुमार से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने पेड़ कटवाने के निर्देश देने से इनकार कर दिया और फोन काट दिया।
सूत्रों के मुताबिक परिसर में केवल दो ही नहीं, बल्कि तीन अन्य बड़े पेड़ भी विभाग की ओर से कटवाए गए हैं। इस घटना के बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभाग की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि नीम और पीपल जैसे पेड़ों को काटने के लिए नियमानुसार अनुमति आवश्यक होती है। ऐसे में बिना स्पष्ट अनुमति इतनी बड़ी कार्रवाई कैसे हुई, यह जांच का विषय है।
वहीं पर्यावरणविद् बाबू लाल जाजू का कहना है कि चाहे कोई भी विभाग हो, बिना अनुमति के ऐसे पेड़ नहीं काट सकता। इसके लिए नियमानुसार अनुमति लेना आवश्यक होता है। यदि विभाग ने बिना अनुमति पेड़ कटवाए हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
