पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील के बाद देशभर के सराफा व्यापारियों ने इसे मानने से इंकार कर दिया है। कई जगहों पर व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
पीएम मोदी की अपील
- हाल ही में पीएम मोदी ने जनता से सोना न खरीदने की अपील की थी।
- उनका तर्क था कि सोने की अत्यधिक खरीद से देश की विदेशी मुद्रा और आर्थिक संतुलन पर दबाव पड़ता है।
- उन्होंने इसे “आर्थिक आत्मरक्षा” और “जिम्मेदार देशभक्ति” बताया।
व्यापारियों की प्रतिक्रिया
- सराफा व्यापारी मानते हैं कि सोना भारतीय संस्कृति और निवेश का अहम हिस्सा है।
- उनका कहना है कि सोने की खरीद पर रोक लगाने से व्यापार ठप हो जाएगा और लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।
- कई व्यापारियों ने इसे “व्यवहारिक रूप से असंभव” बताया।
- कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए।
सोना व्यापारियों की प्रतिक्रिया
सोना व्यापारियों ने पीएम मोदी की अपील पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कई ज्वैलर्स ने इसे विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सही कदम माना, लेकिन अधिकांश ने चेतावनी दी कि शादी और त्योहारों की मांग को रोकना असंभव है और इससे लाखों कारीगरों व दुकानों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
व्यापारियों की मुख्य प्रतिक्रियाएँ
- मुंबई ज्वैलर्स:
- कुछ ने कहा कि अपील आर्थिक रूप से उचित है क्योंकि सोना आयात से विदेशी मुद्रा का बड़ा बहाव होता है।
- लेकिन चेतावनी दी कि शादी और त्योहारों की खरीदारी नहीं रुक सकती, जिससे बाजार पर असर सीमित रहेगा।
- कई दुकानदारों ने सवाल उठाया कि “अगर दुकानें बंद हो जाएं तो मजदूर कैसे जिंदा रहेंगे?”
- जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC):
- उद्योग ने कहा कि वे राष्ट्रीय हित में सरकार के साथ खड़े हैं।
- लेकिन साथ ही यह भी बताया कि यह सेक्टर लगभग 50 लाख लोगों की आजीविका से जुड़ा है, इसलिए संतुलित समाधान जरूरी है।
- भारत के अन्य बाजार:
- कई व्यापारियों ने कहा कि अपील पीक वेडिंग सीजन में आई है, जब सोने की मांग सबसे ज्यादा होती है।
- छोटे ज्वैलर्स और कारीगरों को डर है कि मांग घटने से उनकी रोज़ी-रोटी प्रभावित होगी।
आर्थिक संदर्भ
- भारत ने FY26 में लगभग $72 बिलियन का सोना आयात किया, जो कुल आयात बिल का करीब 10% है।
- सरकार का तर्क है कि अगर सोने की मांग 30–40% घटे तो देश सालाना $20–25 बिलियन बचा सकता है।
- लेकिन व्यापारियों का कहना है कि सोना भारतीय परिवारों के लिए सांस्कृतिक और वित्तीय सुरक्षा का प्रतीक है, इसलिए मांग पूरी तरह से खत्म नहीं होगी।
सारांश
पीएम मोदी की अपील ने सोना व्यापारियों और उद्योग जगत में चिंता और बहस दोनों पैदा की है। जहां कुछ इसे विदेशी मुद्रा बचाने का उपाय मानते हैं, वहीं अधिकांश का कहना है कि यह व्यावहारिक नहीं है क्योंकि सोना भारतीय परंपरा और रोजगार से गहराई से जुड़ा है।
आर्थिक असर
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोना आयातक है।
- हर साल अरबों डॉलर का सोना आयात होता है, जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ता है।
- सरकार चाहती है कि लोग सोने की बजाय अन्य निवेश विकल्प अपनाएं।
निष्कर्ष
पीएम मोदी की अपील का मकसद आर्थिक दबाव कम करना था, लेकिन सराफा व्यापारियों ने इसे अपने कारोबार और परंपरा पर हमला माना। अब यह मुद्दा आर्थिक नीति बनाम सांस्कृतिक परंपरा की बहस का रूप लेता जा रहा है।
