भीलवाड़ा । जिले में बिना विभागीय मान्यता के संचालित विद्यालयों का मामला एक बार फिर चर्चा में आने के बाद लाडो सेवा फाउंडेशन ने इस पूरे प्रकरण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। फाउंडेशन ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध रूप से संचालित विद्यालयों की गहनता से जांच करे क्या इन विद्यालयों के भवन सही से बने हे,क्या विद्यालय कृषि भूमि पर तो नहीं बने हे, या आवासीय भवन में ही विद्यालय संचालित हो रहे हैं,अगर ये हो रहा है तो ऐसे विद्यालयो को बंद कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अध्यक्ष अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा कि बिना मान्यता के विद्यालय संचालित होना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि हजारों मासूम बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है। सबसे अधिक प्रभावित वे गरीब और श्रमिक परिवार हैं, जो जागरूकता के अभाव में अपने बच्चों का प्रवेश ऐसे विद्यालयों में करवा देते हैं और बाद में उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी किए गए नोटिसों की अवहेलना के बावजूद विद्यालयों का संचालन लगातार जारी है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कानून का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
फाउंडेशन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले में संचालित सभी बिना मान्यता वाले विद्यालयों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर तत्काल कार्रवाई की जाए, दोषी संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई हो तथा अध्ययनरत विद्यार्थियों का प्रवेश बिना किसी विलंब के निकटवर्ती मान्यता प्राप्त विद्यालयों में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित निरीक्षण एवं जवाबदेही तय की जाए।
अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा कि “शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है। किसी भी बच्चे का भविष्य लापरवाही, अनियमितता या अवैध विद्यालयों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। प्रशासन की त्वरित, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई ही समाज में विश्वास स्थापित करेगी तथा शिक्षा व्यवस्था की गरिमा को बनाए रखेगी।”
लाडो सेवा फाउंडेशन ने विश्वास व्यक्त किया कि जिला प्रशासन इस गंभीर विषय को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र ठोस कार्रवाई करेगा, जिससे जिले के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, मान्यता प्राप्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित हो सके।
