मांडलगढ़ का चुनावी विरोधाभास: भाजपा के दो प्रत्याशियों को 4-4 वोट, निर्दलीय पति-पत्नी दोनों विजयी
वार्ड 17 में बहादुर सिंह राठौड़ और वार्ड 18 में सीता देवी को मिले सिर्फ चार-चार मत; वार्ड 15 से पवन ओस्तवाल और वार्ड 2 से जूली ओस्तवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दर्ज की जीत
मांडलगढ़, स्मार्ट हलचल।
मांडलगढ़ नगर पालिका चुनाव के नतीजों में एक ऐसा चुनावी विरोधाभास सामने आया है,
जो चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय जनता पार्टी के दो प्रत्याशी अपने-अपने वार्ड
में दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। वार्ड संख्या 17 से भाजपा प्रत्याशी
बहादुर सिंह राठौड़ को महज 4 मत मिले, जबकि
वार्ड संख्या 18 से भाजपा प्रत्याशी सीता देवी को भी
4 मत ही प्राप्त हुए।
भाजपा राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में शामिल है और राजस्थान के
निकाय चुनावों में पार्टी ने कई निकायों में मजबूत प्रदर्शन किया है। ऐसे में
मांडलगढ़ के इन दो वार्डों के आंकड़े राजनीतिक दृष्टि से खासे दिलचस्प नजर आते हैं।
हालांकि यह परिणाम किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी से ज्यादा स्थानीय चुनाव में
मतदाताओं के फैसले और वार्ड स्तर के समीकरण को सामने लाता है।
चार वोट की चर्चा
वार्ड संख्या 17
बहादुर सिंह राठौड़ — भाजपा
मिले सिर्फ 4 वोट
वार्ड संख्या 18
सीता देवी — भाजपा
मिले सिर्फ 4 वोट
दूसरी तस्वीर: निर्दलीय पति-पत्नी की जीत
इसी चुनाव में दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में मैदान में उतरे
पवन ओस्तवाल और जूली ओस्तवाल ने जीत दर्ज की। खास बात यह है कि
दोनों पति-पत्नी हैं और अलग-अलग वार्डों से निर्दलीय प्रत्याशी के
रूप में चुनाव जीतने में सफल रहे।
निर्दलीय पति-पत्नी — 186 और 195 वोट
मांडलगढ़ के इन परिणामों में सबसे दिलचस्प बात यही है कि एक ही नगर पालिका चुनाव
में पार्टी प्रत्याशियों और निर्दलीय प्रत्याशियों के परिणामों में इतना बड़ा
अंतर देखने को मिला। एक ओर दो भाजपा प्रत्याशी महज चार-चार मतों तक सीमित रहे,
वहीं दूसरी ओर निर्दलीय पति-पत्नी ने अपने-अपने वार्ड में मतदाताओं का भरोसा
हासिल कर जीत दर्ज की।
निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, वार्ड के
समीकरण और मतदाताओं का व्यक्तिगत जुड़ाव कई बार राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न
से अलग परिणाम सामने ला सकता है। मांडलगढ़ का यह परिणाम इसी पहलू को दिलचस्प
तरीके से सामने रखता है।
पार्टी का नाम बड़ा हो सकता है,
लेकिन वार्ड में जनता का फैसला सबसे बड़ा होता है।
मांडलगढ़ के इन नतीजों ने चुनावी राजनीति का एक दिलचस्प पक्ष सामने रखा है—
जहां बड़े राजनीतिक दल के दो प्रत्याशियों के खाते में चार-चार मत आए, वहीं
निर्दलीय पति-पत्नी की जोड़ी ने अलग-अलग वार्डों से जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी
दर्ज कराई।