पुनित चपलोत
भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|सावन के पावन अवसर पर वस्त्रनगरी भीलवाड़ा सोमवार को शिवभक्ति में डूबी नजर आई। चारों ओर गूंजते ‘बम-बम भोले’ और ‘जय शिव शंभू’ के जयकारों के बीच टीम ‘जय भोले’ लेबर कॉलोनी के तत्वावधान में 5वीं विशाल कांवड़ यात्रा निकाली गई। हजारों शिवभक्तों की मौजूदगी में निकली इस भव्य यात्रा ने शहर को भक्तिमय बना दिया। लेबर कॉलोनी स्थित नर्मदाश्वर महादेव मंदिर से सुबह 8.15 बजे शुरू हुई यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई प्रसिद्ध हरणी महादेव मंदिर पहुंची। यहां हरिद्वार एवं ऋषिकेश से लाए गए पावन गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया।
संयोजक एवं पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राजावत की अगुवाई में निकली कांवड़ यात्रा का शहर में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग यात्रा देखने के लिए उमड़े। श्रद्धालु कांवड़ लेकर शिवभक्ति में लीन नजर आए।
इस बार कांवड़ यात्रा में धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला। पुणे से विशेष रूप से आया ‘शिखंडी ढोल व ताशा पथक’ यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। ढोल-ताशों की जोशीली और संगीतमय प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु झूम उठे। चित्तौड़गढ़ के जय हनुमान बैंड ने भी अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को शिवमय कर दिया।
हरियाणा के पुंडरी से आए महादेव आर्ट्स ग्रुप की जीवंत धार्मिक झांकियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। नंदी बैल, गोरिल्ला, महाकाल शंकर, अघोर महाकाल, अघोरी और महाकाली की सजीव प्रस्तुतियां यात्रा की भव्यता बढ़ाती रहीं। वहीं जयपुर से विशेष रूप से बुलाए गए दो शाही गजराज और विशालकाय शिव प्रतिमाएं आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं।
आयोजन से जुड़े पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं को ‘जय भोले’ कहकर संबोधित करने की परंपरा है। इसी परंपरा और भावना से प्रेरित होकर कांवड़ यात्रा का नाम ‘जय भोले कांवड़ यात्रा’ रखा गया। उन्होंने बताया कि यात्रा का आयोजन लगातार पांचवें वर्ष किया गया है और हर वर्ष इसमें श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ रही है।
अध्यक्ष अनिल चौहान एवं सचिव सौरभ साहनी ने बताया कि यात्रा मार्ग में शिवभक्तों के लिए पानी, फलाहार और स्वास्थ्य सेवाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। नर्मदाश्वर महादेव मंदिर से हरणी महादेव तक पूरा मार्ग शिवभक्ति के जयकारों से गूंजता रहा।
हरणी महादेव मंदिर पहुंचने पर सामूहिक आरती की गई और भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। भक्ति, आस्था और उत्साह से सराबोर जय भोले कांवड़ यात्रा का धार्मिक उल्लास के बीच समापन हुआ।
