चरागाह में रातभर चला मिट्टी का खेल! ग्रामीणों ने घेरा डंपर-जेसीबी, हंगामे के बीच वाहन छुड़ाकर ले जाने का आरोप

मलगानी में अवैध मिट्टी दोहन को लेकर बवाल, प्रशासन की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

मांडल = मलगानी गांव की सरकारी चरागाह भूमि में रविवार देर रात कथित अवैध मिट्टी दोहन को लेकर ग्रामीणों और खनन कार्य से जुड़े लोगों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन और डंपरों की मदद से चरागाह भूमि से मिट्टी निकाली जा रही थी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और विरोध जताते हुए खनन में लगे वाहनों को घेर लिया।

ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने डंपर संख्या आरजे 09 जीसी 4001 सहित अन्य वाहनों को मौके पर रोक लिया था, लेकिन विरोध और हंगामे के दौरान खनन कार्य से जुड़े लोगों ने दबंगई दिखाते हुए वाहनों को छुड़ाकर ले जाने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने उन्हें डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया है। घटना के बाद गांव में देर रात तक आक्रोश और चर्चा का माहौल बना रहा।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

ग्रामीण ओमप्रकाश, बालूराम, राहुल, रतनलाल जाट, हनुमान जाट, बालूलाल जाट, सूरजमल और जगदीश सहित अन्य लोगों का कहना है कि चरागाह भूमि से मिट्टी दोहन की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को दी जा चुकी है, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध गतिविधियां लगातार जारी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद कुछ समय तक गतिविधियां बंद रहती हैं, लेकिन बाद में फिर से शुरू हो जाती हैं।

भट्ठे तक पहुंच रही मिट्टी?

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चरागाह भूमि से निकाली जा रही मिट्टी का उपयोग स्थानीय ईंट भट्ठे पर किया जा रहा है। उनका दावा है कि भट्ठे के आसपास मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर मिट्टी के स्रोत की पुष्टि करने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

चरागाह भूमि पर बढ़ता खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि चरागाह भूमि गांव की महत्वपूर्ण संपत्ति है, जहां पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होता है। लगातार मिट्टी निकाले जाने से गहरे गड्ढे बन रहे हैं, जिससे भविष्य में पशुपालकों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

– अवैध मिट्टी दोहन की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
– खनन में प्रयुक्त जेसीबी और डंपरों को जब्त किया जाए।
– सरकारी चरागाह भूमि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
– मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

नोट : यह समाचार ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायतों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।