चित्तौड़गढ़ जिला परिषद चुनाव…….. अपनों की जंग,साख का दांव और दिग्गजों का शक्ति परीक्षण

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विशेष राजनीतिक रिपोर्ट # 7- आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ ।स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ जिला परिषद चुनाव में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। जिला प्रमुख की कुर्सी हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने मजबूत प्यादे मैदान में उतार दिए हैं। कहीं वंशवाद और जमीनी पहचान के बीच सीधी भिड़ंत है, तो कहीं संगठन की साख का दांव लगा है। स्थानीयता का मुद्दा, जातियों का गणित और भीतरघात की आशंकाओं के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प और विस्फोटक हो चुका है । आइए जानते हैं जिला परिषद के प्रमुख वार्डों की ग्राउंड रिपोर्ट और वहाँ के सियासी समीकरण …..
वार्ड नंबर 04- भाजपा जिलाध्यक्ष की बेटी का ‘जमीनी पहचान’ से मुकाबला !
वार्ड नंबर 04 पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यहाँ से भाजपा जिलाध्यक्ष रतन गाडरी ने अपने गृहक्षेत्र भदेसर को छोड़कर अपनी पुत्री सीमा गाडरी को मैदान में उतारा है। सीमा गाडरी को अपने पिता के राजनीतिक प्रभाव और भाजपा के कैडर का सीधा फायदा मिल रहा है । वहीं कांग्रेस ने यहाँ से मदन जाट को प्रत्याशी बनाकर दांव खेला है। पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रहे मदन जाट की क्षेत्र में मजबूत जमीनी पहचान और पकड़ मानी जाती है। आप को बतातें है सियासी समीकरण- नेतावल महाराज, तुंबड़िया, ओडुंद, सतपुडा, रोलाहेड़ा, ठिकरिया, लालजी का खेड़ा, बोजुन्दा, घोसुण्डा और ओछ्ड़ी जैसी ग्राम पंचायतों वाले इस वार्ड में जाट और गाडरी समाज का बड़ा वोटबैंक है। हालांकि, सीमा गाडरी के लिए भदेसर छोड़कर यहाँ आने से ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ का मुद्दा हावी हो रहा है। भाजपा के कोर वोटर्स में संभावित बिखराव और स्थानीयता का असर यहाँ मुकाबले को बेहद कड़ा बना रहा है ।
वार्ड नंबर 03- रति पुरोहित बनाम रानी सोनी
जिला प्रमुख पद के दावेदारों के लिहाज से यह वार्ड बेहद अहम है। भाजपा की ओर से रति पुरोहित मैदान में हैं, जो भाजपा के वरिष्ठ नेता और बांसवाड़ा के संगठन प्रभारी कमलेश पुरोहित की धर्मपत्नी हैं। कमलेश पुरोहित के पूर्व सरपंच रहने और संगठन में लंबे अनुभव का लाभ रति पुरोहित को ग्रामीण इलाकों में सीधे तौर पर मिलता दिख रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस से रानी सोनी मैदान में हैं। बस्सी ग्राम पंचायत जो विधानसभा की सबसे बड़ी पंचायतों में से एक है से ताल्लुक रखने वाले उनके पति दिनेश सोनी भी कांग्रेस संगठन में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। इसमें आती है मुख्य ग्राम पंचायतें- आवलहेड़ा, छोसुंडी, बस्सी, नगरी, सोनगर, पालका और बलदरखा । यहाँ दो मजबूत राजनीतिक परिवारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई है ।
अरुणा कँवर बनाम आजाद पालीवाल
इसी वार्ड/क्षेत्र में भाजपा की अरुणा कँवर नारेला का मुकाबला कांग्रेस के आजाद पालीवाल से हो रहा है।
अरुणा कँवर- नारेला की पूर्व सरपंच और ग्रामीण सहकारी समिति की निर्विरोध अध्यक्ष रहने के कारण उनका प्रशासनिक और ग्रामीण नेटवर्क मजबूत माना जा रहा है । आजाद पालीवाल-कांग्रेस संगठन के लंबे अनुभव का फायदा उन्हें मिल सकता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सीधी पकड़ की कमी उनके लिए चुनौती साबित हो सकती है।
वार्ड नंबर 34-भाजपा के अंदरूनी कलह से क्या छोटू कँवर मारेंगी बाजी ?
जिला प्रमुख के चेहरे को लेकर भाजपा में चल रही अंदरूनी खींचतान का सीधा लाभ वार्ड नंबर 34 की प्रत्याशी छोटू कँवर को मिल सकता है । छोटू कँवर इनके पति देवी सिंह राणावत गंगरार क्षेत्र के जाने-माने चेहरे हैं और पूर्व प्रधान रह चुके हैं । इनके सामने गंगरार पंचायत समिति की निवर्तमान प्रधान लक्ष्मी कँवर मैदान में हैं। इसके अलावा, हाल ही में यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने इनके पुत्र रविंद्र सिंह राणावत की सक्रियता भी कांग्रेस प्रत्याशी की ताकत बढ़ा रही है । यहाँ दिग्गजों के आपसी तालमेल और बगावती सुरों का सीधा असर नतीजों पर पड़ना तय है ।
वार्ड नंबर 21- सामान्य सीट पर ओबीसी दांव बनाम कारोबारी घराना !
सामान्य महिला के लिए आरक्षित वार्ड नंबर 21 में मुकाबला बेहद रोचक मोड़ पर है भाजपा ने सामान्य सीट पर OBC वर्ग से सुगना देवी को मौका दिया है। सुगना देवी पूर्व में दिग्गज कांग्रेस नेता गोविंद सिंह नरधारी को शिकस्त दे चुकी हैं। इनके पुत्र हीरा लाल रायक (खनन व ट्रांसपोर्ट व्यवसायी) धीरजी का खेड़ा से सरपंच प्रत्याशी भी हैं। कन्नौज ग्राम पंचायत के बड़े व्यावसायिक घराने से आने वाली पूर्व सरपंच मंजू देवी की क्षेत्र में एक खास पहचान और व्यापक प्रभाव है । दो आर्थिक व राजनीतिक रूप से मजबूत परिवारों और चेहरों के बीच का यह मुकाबला कांटे का साबित हो रहा है।
चित्तौड़गढ़ का यह चुनाव केवल प्रत्याशियों की जीत-हार का नहीं, बल्कि कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा और राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगा। जहाँ एक तरफ भाजपा अपने संगठन और कैडर के भरोसे है, वहीं कांग्रेस स्थानीय चेहरों और जमीनी पकड़ के जरिए सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रही है।