प्रभु गुर्जर बने चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ केसरी, खुशी परिहार ने जीता पन्नाधाय केसरी खिताब

चित्तौड़गढ़, 18 जून। स्मार्ट हलचल।वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर महावीर व्यायामशाला द्वारा आयोजित दो दिवसीय कुश्ती दंगल एवं शोभायात्रा का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, छोटीसादड़ी, सामरी एवं आसपास के क्षेत्रों के पहलवानों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

महावीर व्यायामशाला के उस्ताद पहलवान कैलाशचंद्र गुर्जर ने बताया कि खिताबी दंगल में सामरी के प्रभु गुर्जर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ केसरी का खिताब अपने नाम किया। खुशीराम द्वितीय एवं विशाल (छोटीसादड़ी) तृतीय स्थान पर रहे।

महिला वर्ग में महावीर व्यायामशाला चित्तौड़गढ़ की खुशी परिहार ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पन्नाधाय चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ केसरी का खिताब जीता। हेमू गुर्जर सामरी द्वितीय तथा सोनिया सामरी तृतीय स्थान पर रहीं।

कुमार वर्ग में लोकेश गुर्जर (सामरी) प्रथम, रोहित सामरी द्वितीय एवं अभिषेक माली (छोटीसादड़ी) तृतीय रहे। किशोर वर्ग में अर्जुन माली (छोटीसादड़ी) प्रथम, कुशाल बिलोरिया द्वितीय एवं गौतम चित्तौड़गढ़ तृतीय स्थान पर रहे।

दंगल में विभिन्न भार वर्गों की प्रतियोगिताओं में भी पहलवानों ने दमखम दिखाया और विजेताओं को नगद पुरस्कार एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, भाजपा जिलाध्यक्ष रतन गाडरी, शैलेन्द्र झंवर, गौरव त्यागी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। समापन समारोह में आरएसएस विभाग संघचालक हेमंत जैन, जिला संघचालक अनिरुद्ध सिंह भाटी, जिला प्रचारक मयंक, नगर प्रचारक देवांग, यूआईटी सचिव कैलाशचंद्र गुर्जर, ओम सुखवाल एवं व्यायामशाला अध्यक्ष बसंतीलाल पोखरना ने विजेताओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर महावीर व्यायामशाला की परंपरा के तहत उत्तराधिकारी घोषित करने का विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मेवाड़ की विभिन्न व्यायामशालाओं के उस्तादों की उपस्थिति में उस्ताद देवराज पहलवान एवं उस्ताद कैलाश पहलवान ने मनोज सोनी एवं रामरतन गुर्जर को व्यायामशाला का नया खलीफा एवं उत्तराधिकारी घोषित कर शपथ दिलाई।

इससे पूर्व महाराणा प्रताप जयंती पर झालीबाव से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए व्यायामशाला पहुंची। शोभायात्रा में अखाड़ा प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। समापन पर उस्ताद कैलाश पहलवान ने महाराणा प्रताप के जीवन, त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति पर प्रकाश डाला।