वार्ड 53 बना आईना, पूरे शहर की सीवरेज व्यवस्था सवालों के घेरे में!

महेन्द्र नागौरी

दादाबाड़ी की गली में सीवरेज का गंदा पानी और दुर्गंध; शहरभर में खुले ढक्कन, बहता पानी और जानलेवा गड्ढे—निकाय चुनाव में विकास के दावों की होगी अग्निपरीक्षा

भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|नगर निकाय चुनाव में विकास के दावों की गूंज तेज है, लेकिन शहर की गलियों में पसरी बदहाली इन दावों पर तीखे सवाल खड़े कर रही है। वार्ड नंबर 53 दादाबाड़ी में गणपत कबाड़ी के मकान के पीछे वाली गली इस बदहाल व्यवस्था का आईना बन गई है, जहां सीवरेज लाइन से गंदा पानी और गंदगी बाहर निकल रही है। सड़क पर फैले गंदे पानी से तेज दुर्गंध उठ रही है और स्थानीय लोगों को संक्रमण व बीमारी फैलने का डर सता रहा है।
लेकिन वार्ड 53 की यह तस्वीर अकेली नहीं है। शहर के कई हिस्सों में सीवरेज के टूटे या खुले ढक्कन, ओवरफ्लो होती लाइनें और सड़कों पर बहता गंदा पानी आमजन की परेशानी बने हुए हैं। कहीं सीवरेज का पानी सड़क पर है तो कहीं खुले चैंबर लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
सीवरेज के साथ सड़कों पर भी संकट
शहर में जगह-जगह सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। कई गड्ढे इतने गहरे हैं कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए जरा सी चूक हादसे में बदल सकती है। सीवरेज का पानी इन गड्ढों को और खतरनाक बना देता है। दिन में किसी तरह नजर आने वाले ये गड्ढे रात में हादसे का खुला न्योता बन जाते हैं।
सवाल यह नहीं कि वार्ड 53 की गली कब साफ होगी—सवाल यह है कि पूरे शहर की सीवरेज व्यवस्था आखिर कब सुधरेगी?
चुनाव में पोस्टर चमकेंगे, गलियां जवाब मांगेंगी
निकाय चुनाव के बीच प्रत्याशी विकास के दावे लेकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं। लेकिन जनता के सामने अब सवाल भी कम नहीं हैं—खुले सीवरेज चैंबर कब बंद होंगे? सड़कों पर बहता गंदा पानी कब रुकेगा? जानलेवा गड्ढे कब भरेंगे? और शहरवासियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए आखिर कब तक शिकायत करनी पड़ेगी?
वार्ड 53 की यह तस्वीर चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखाती है। वोट मांगने वालों के सामने अब जनता केवल भाषण नहीं, समाधान का हिसाब मांग सकती है।
क्योंकि चुनावी नारों से शहर की बदबू नहीं जाएगी, पोस्टरों से गड्ढे नहीं भरेंगे और दावों से सीवरेज नहीं सुधरेगी।
इस बार असली सवाल यही है—विकास कागज पर है या शहर की सड़कों पर?