वार्ड 39 की अर्चना दुबे की याचिका पर सुनवाई, 7 सितंबर को अगली तारीख, 53 सिंबल स्वीकार, 17 पर अटका पेंच
(पंकज पोरवाल)
भीलवाड़ा ।स्मार्ट हलचल|नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 अधिकृत प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न स्वीकार नहीं किए जाने का विवाद अब राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर पहुंच गया है। वार्ड 39 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दावेदारी जता टिकट मांगने वाली प्रत्याशी अर्चना दुबे ने राज्य निर्वाचन आयोग व अन्य के खिलाफ याचिका दायर कर पूरे घटनाक्रम को चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति मुकेश राजपुरोहित की एकलपीठ में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में प्रतिवादी पक्ष से जवाब और आवश्यक निर्देश लेने को कहा है। अब मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी। याचिकाकर्ता अर्चना दुबे की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। उनका दावा है कि दोपहर 3 बजे की तय समय-सीमा समाप्त होने से पहले ही पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि सिंबल लेकर आरओ के पास पहुंच गए थे, लेकिन इसके बावजूद 17 प्रत्याशियों के सिंबल स्वीकार नहीं किए गए। वहीं, निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह तर्क सामने आया कि सिंबल प्रस्तुत करने की निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो चुकी थी। सिंबल समय पर स्वीकार नहीं होने के कारण कांग्रेस के 17 अधिकृत प्रत्याशी चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो गए। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस संगठन में हलचल मच गई और पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे।
*53 सिंबल स्वीकार, 17 पर क्यों लगा ब्रेक?*
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी से दावेदारी कर टिकट मांगने वाली प्रत्याशी अर्चना दुबे और वार्ड 44 से कांग्रेस के सिंबल पर टिकट मांगने वाले प्रत्याशी जितेंद्र दरियानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन और रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम के सभी 70 वार्डों के सिंबल 31 अगस्त को दोपहर 3 बजे से पहले आरओ के समक्ष प्रस्तुत किए थे, लेकिन इनमें से केवल 53 सिंबल स्वीकार किए गए और 17 सिंबल यह कहते हुए स्वीकार नहीं किए गए कि समय समाप्त हो चुका है। दुबे ने सवाल उठाया कि यदि 53 सिंबल स्वीकार किए गए तो बाकी 17 सिंबल के मामले में अलग स्थिति क्यों बनी? उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या आरओ पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी?
*पीसीसी करा रही जांच, जरूरत पड़ी तो राष्ट्रीय नेतृत्व तक जाएंगे*
अर्चना दुबे ने कहा कि इस पूरे मामले की पीसीसी स्तर पर जांच कराई जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि हाईकोर्ट से न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे अपनी बात कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी तक भी पहुंचाएंगी। दुबे ने कहा कि यह केवल उनके चुनाव लड़ने का सवाल नहीं है, बल्कि 17 प्रत्याशियों के साथ हुई पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों का मामला है। अब इस पूरे विवाद में 7 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई पर कांग्रेस और राजनीतिक गलियारों की निगाहें टिकी हैं।
