निकाय चुनाव में झटके के बाद कांग्रेस का पंचायत चुनाव में शक्ति प्रदर्शन, गहलोत-पायलट समेत दिग्गजों को मैदान में उतारा

निकाय चुनाव की हार से सबक लेकर गांवों में सियासी घेराबंदी की तैयारी, वरिष्ठ नेताओं को जिलों की जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति

जयपुर। स्मार्ट हलचल।राजस्थान के निकाय चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने अब पंचायत चुनाव में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर ली है। शहरों की सियासत में मिले झटके के बाद पार्टी ने अब गांवों में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने के लिए दिग्गज नेताओं की फौज उतारने का फैसला किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वरिष्ठ नेताओं को चुनाव अभियान की कमान सौंपकर कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि पंचायत चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की ओर से गठित चुनाव कैंपेन कमेटी में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी, हरीश चौधरी, नीरज डांगी, जितेंद्र सिंह, रामकेश मीणा, रफीक खान, उदयलाल आंजना, प्रमोद जैन भाया, सालेह मोहम्मद, प्रताप सिंह खाचरियावास, शकुंतला रावत, ममता भूपेश, गणेश घोघरा, हरसहाय यादव, एमडी चौपदार और सीबी यादव सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने गुरुवार को कमेटी की सूची जारी की।

शहरों के बाद अब गांवों में सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई

निकाय चुनाव के बाद पंचायत चुनाव कांग्रेस के लिए केवल स्थानीय निकायों में जीत-हार का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की संगठनात्मक ताकत और जनाधार की परीक्षा भी होगा। शहरों में मिले चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस अब गांवों में अपनी पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की रणनीति पर काम कर रही है।

गहलोत और पायलट जैसे बड़े चेहरों को अभियान में शामिल करना पार्टी की इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता से जहां चुनाव प्रचार को धार देने की उम्मीद है, वहीं पार्टी के सामने इन नेताओं के समर्थकों और स्थानीय गुटों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी।

जिलों में उतरेंगे दिग्गज, तय होगी जिम्मेदारी

कांग्रेस की रणनीति केवल बड़े नेताओं के नामों की सूची जारी करने तक सीमित नहीं है। कैंपेन कमेटी जिलावार प्रचार की रूपरेखा तैयार करेगी और वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपने की दिशा में काम करेगी। संबंधित जिलों में नेताओं के दौरे, जनसभाएं, स्थानीय मुद्दों पर प्रचार और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय चुनाव अभियान के प्रमुख हिस्से होंगे।

जरूरत के मुताबिक नेताओं को उनके निर्धारित क्षेत्रों से बाहर भी प्रचार की जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी की कोशिश रहेगी कि चुनाव अभियान प्रदेश मुख्यालय तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और पंचायत स्तर तक पहुंचे।

युवा संगठनों को भी जोड़ने की कवायद

कांग्रेस ने चुनावी अभियान में अपने अग्रिम संगठनों को भी शामिल किया है। इनके प्रदेश अध्यक्षों को कैंपेन कमेटी में अतिरिक्त सदस्यों के रूप में जगह दी गई है। इसके जरिए पार्टी युवाओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं की ताकत को चुनाव प्रचार से जोड़ना चाहती है।

हालांकि, असली परीक्षा कमेटी में शामिल चेहरों की संख्या नहीं, बल्कि बूथ और पंचायत स्तर पर संगठन की सक्रियता होगी। वरिष्ठ नेताओं के दौरे तभी असरदार साबित होंगे, जब स्थानीय कार्यकर्ता एकजुट होकर मतदाताओं तक पहुंचेंगे और क्षेत्रीय समस्याओं को चुनावी मुद्दा बना पाएंगे।

अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल

पंचायत चुनाव में कांग्रेस की रणनीति कितनी कारगर साबित होगी, इसका फैसला गांवों की सियासत करेगी। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी पार्टी के प्रचार को मजबूती दे सकती है, लेकिन स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों का चयन, गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी नतीजों पर असर डालेंगे।

निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस ने पंचायत चुनाव में पूरी ताकत झोंकने का संकेत तो दे दिया है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि गहलोत-पायलट समेत दिग्गज नेताओं की यह टीम चुनावी रणनीति को वोटों में कितना बदल पाती है।