रसीद काटकर 4 साल से लटका दिया पट्टा

ग्राम पंचायत गुरला की लापरवाही से परेशान चंदा देवी, 120 रु. जमा करवाने के बाद भी नहीं मिली राहत

*’प्रशासन गांवों के संग’ के दावे फेल, महिला चंदा देवी सुवालका दर-दर भटकने को मजबूर*

गुरला:-स्मार्ट हलचल|सरकार के “प्रशासन गांवों के संग” के दावों की पोल ग्राम पंचायत गुरला में खुली। यहां पट्टे के नाम पर शुल्क लेकर रसीद तो दे दी गई, लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित महिला को पट्टा नसीब नहीं हुआ।
पंचायत समिति सुवाणा के ग्राम पंचायत गुरला की केलाशपुरी निवासी *चंदा देवी पत्नी सुवालका पति प्रभु लाल सुवालका* ने 17 अक्टूबर 2022 को रसीद संख्या 87 के माध्यम से पट्टे के लिए 120 रुपये जमा करवाए थे। रसीद में आवेदन शुल्क, नक्शा शुल्क, नजरी नक्शा और पट्टा शुल्क का स्पष्ट उल्लेख है। रसीद पर पंचायत सचिव के हस्ताक्षर भी हैं।चंदा देवी का कहना है कि “रसीद कटवाने के बाद से आज तक 4 साल हो गए।ऊगमा लाल सुवालका ने बताया की इस दौरान दर्जनों बार पंचायत के चक्कर काट चुका हूं। हर बार नई तारीख दे देते हैं। न पट्टा बना कर देते अब तो उम्मीद भी टूटने लगी है।”ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में पट्टों के नाम पर आमजन से पैसे तो ले लिए जाते हैं, लेकिन फाइलें महीनों-वर्षों तक धूल फांकती रहती हैं।
राजस्थान पंचायत नियम, 1996 के नियम 158 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के पात्र सदस्यों को रियायती दर पर पट्टा जारी करने का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद ग्राम पंचायत के प्रशासक द्वारा पात्र व्यक्तियों को पट्टे जारी नहीं किए जा रहे हैं। यह नियमों की अवहेलना होने के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों के वैधानिक अधिकारों का भी हनन है। ग्रामीणों और पीड़ित ने जिला कलेक्टर भीलवाड़ा, BDO सुवाणा और पंचायती राज विभाग से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए और पीड़ित महिला को तत्काल पट्टा जारी किया जाए