फिशिंग, हैकिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के उपायों पर विस्तृत प्रशिक्षण
डिजिटल सुरक्षा की पहली शर्त है जागरूकता : कुलगुरु प्रो. बी. पी. सारस्वत
मोबाइल का विवेकपूर्ण उपयोग ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय : प्रो. सारस्वत
डिजिटल अनुशासन अपनाएं, साइबर अपराधों से खुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं : प्रो. सारस्वत
कोटा विश्वविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला, साइबर अपराधों से बचाव के आधुनिक उपायों से विद्यार्थियों को कराया अवगत
कोटा, 21 जुलाई। स्मार्ट हलचल|डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं के बीच युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से कोटा विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी (सीएसआई) विभाग के विद्यार्थियों द्वारा संचालित टेक प्लेनेट क्लब के तत्वावधान में मंगलवार को “मोबाइल एवं सोशल मीडिया सिक्योरिटी” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में साइबर विशेषज्ञों ने मोबाइल सुरक्षा, सोशल मीडिया प्राइवेसी, ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव तथा साइबर कानूनों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी. पी. सारस्वत ने कहा कि आज मोबाइल फोन केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में इसकी सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि “मोबाइल दोधारी तलवार की तरह है। इसका विवेकपूर्ण और सकारात्मक उपयोग ही व्यक्ति को सुरक्षित रख सकता है। शिक्षित और जागरूक लोग भी साइबर अपराधों का शिकार हो रहे हैं, इसलिए तकनीकी ज्ञान के साथ सतर्कता और डिजिटल अनुशासन अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे स्वयं साइबर सुरक्षा के प्रति सजग रहें और समाज में भी डिजिटल जागरूकता के वाहक बनें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. रीना दाधीच ने की। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती निर्भरता के दौर में मोबाइल एवं सोशल मीडिया का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से मजबूत पासवर्ड का उपयोग करने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने, मोबाइल की सुरक्षा सेटिंग्स नियमित रूप से अपडेट रखने, सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतने तथा फर्जी प्रोफाइल, संदिग्ध लिंक और साइबर ठगी से सतर्क रहने का आग्रह किया।
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में एएसडी साइबर सिक्योरिटी अकादमी, कोटा के विशेषज्ञ तपन कुमार झा ने मोबाइल एवं सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण तथा अकाउंट हैकिंग की कार्यप्रणाली पर प्रायोगिक जानकारी दी। उन्होंने फिशिंग स्कैम की पहचान, टू-स्टेप वेरिफिकेशन, ऐप परमिशन मैनेजमेंट, मैलवेयर से सुरक्षा, पब्लिक वाई-फाई के जोखिम, सोशल मीडिया प्राइवेसी सेटिंग्स, डिजिटल फुटप्रिंट, कैटफिशिंग तथा फर्जी लिंक एवं ऑनलाइन गिवअवे के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी से बचाव के प्रभावी उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी), कोटा गंगा सहाय शर्मा ने साइबर अपराधों की बदलती प्रवृत्तियों, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव तथा साइबर सुरक्षा के प्रति सतत जागरूक रहने की आवश्यकता पर व्याख्यान दिया। वहीं साइबर क्राइम ऑफिस, कोटा के वजीर सिंह एवं विकास ने साइबर अपराधों के विभिन्न प्रकार, प्रासंगिक साइबर कानून, कानूनी प्रावधानों तथा डिजिटल सुरक्षा से जुड़े Do’s and Don’ts की उपयोगी जानकारी साझा की।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े अनेक व्यावहारिक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक समाधान किया। संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों को ऑनलाइन जोखिमों की पहचान और उनसे प्रभावी बचाव के उपायों से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. ओ. पी. ऋषि एवं प्रो. पी. सी. गुप्ता, विभाग के समस्त संकाय सदस्य, अतिथि संकाय सदस्य तथा इंटीग्रेटेड एमसीए (आईएमसीए), एमसीए एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के लगभग 150 पंजीकृत विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर कार्यशाला को सफल बनाया।
