शाहपुरा जिले की बहाली की मांग तेज, 14वां स्मरणपत्र मुख्यमंत्री के नाम सौंपा

ब्लैक डे पर अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का किया बहिष्कार, संघर्ष समिति ने विधायक के खिलाफ खोला मोर्चा
रिपोर्टर सुरज वर्मा
स्मार्ट हलचल|शाहपुरा को पुनः जिले का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर शाहपुरा जिला बहाल करो संघर्ष समिति का आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के एक वर्ष सात माह पूरे होने पर मंगलवार को संघर्ष समिति ने ब्लैक डे मनाते हुए मुख्यमंत्री के नाम 14वां स्मरणपत्र उपखंड अधिकारी को सौंपा। इस दौरान समिति पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और बड़ी संख्या में आमजन ने उपखंड कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर “शाहपुरा जिला बहाल करो” के नारे लगाए।
संघर्ष समिति के महासचिव एडवोकेट कमलेश मुंडेतिया ने बताया कि 28 दिसंबर 2024 को शाहपुरा का जिला दर्जा समाप्त किए जाने के बाद से प्रत्येक माह की 28 तारीख को ब्लैक डे मनाया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को समिति अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा एवं संयोजक रामप्रसाद जाट के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम स्मरणपत्र सौंपकर सरकार को शाहपुरा को पुनः जिला बनाने के वादे की याद दिलाई गई।
उन्होंने बताया कि करीब एक वर्ष चार माह पूर्व जयपुर में मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में शाहपुरा विधायक की उपस्थिति में जिला बहाल करने का सकारात्मक आश्वासन दिया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बावजूद कोई निर्णय नहीं होने से क्षेत्रवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया
ब्लैक डे के समर्थन में अभिभाषक संस्था शाहपुरा ने भी न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल ने न्यायालय में कार्य स्थगन पत्र प्रस्तुत किया, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने संघर्ष समिति के समर्थन में सभी न्यायालयों में न्यायिक कार्य से विरत रहकर जिला बहाली की मांग को मजबूती दी।
चुनाव से पहले आंदोलन होगा और तेज
संघर्ष समिति के सहसंयोजक सूर्यप्रकाश ओझा ने कहा कि जब तक शाहपुरा को पुनः जिले का दर्जा नहीं मिल जाता, आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आगामी पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनाव से पहले आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जाएगा।विधायक पर लगाया प्रतिशोध की राजनीति का आरोप इसके बाद संघर्ष समिति की समीक्षा बैठक अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि आंदोलन को नए स्वरूप में आगे बढ़ाया जाएगा तथा नगर निकाय चुनाव को लेकर भी रणनीति तैयार की जाएगी। समिति इस बात पर भी विचार करेगी कि चुनाव स्वयं लड़ा जाए अथवा जिला बहाली के समर्थन में खड़े प्रत्याशियों का समर्थन किया जाए।
बैठक में संयोजक रामप्रसाद जाट ने आरोप लगाया कि सरकार एवं स्थानीय विधायक आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति के महासचिव एडवोकेट कमलेश मुंडेतिया की बहन का स्थानांतरण पंचायत समिति शाहपुरा से सहाड़ा केवल समिति से जुड़े होने के कारण किया गया, जबकि उनके बच्चे का अहमदाबाद में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ है और उसकी स्थिति गंभीर है। समिति ने इसे प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए इसकी निंदा की।
पांच सदस्यीय समिति का गठन
बैठक में सरकार एवं संघर्ष समिति के बीच संवाद बनाए रखने तथा समिति सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इसमें रामप्रसाद जाट को संयोजक तथा सूर्यप्रकाश ओझा, उदयलाल बेरवा, और सत्यनारायण पाठक को सदस्य बनाया गया।
इस अवसर पर अभिभाषक संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल, उपाध्यक्ष अंकित शर्मा, संरक्षक सत्यनारायण पाठक, हाजी उस्मान मोहम्मद छिपा, राजेन्द्र पांडे, अजय मेहता, रामेश्वरलाल सोलंकी, सुरेश घूसर, उदयलाल बेरवा, प्रवीण पारीक, नूर मोहम्मद रंगरेज, सुरेश गुर्जर, रमेशचंद्र मालू, मदनलाल कंडारा, रामप्रसाद सेन, सुनील मिश्रा, थानमल जीनगर, नजीर मोहम्मद, रामस्वरूप खटीक, ओमप्रकाश सिंधी, अभय गुर्जर, वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकचंद नौलखा, अधिवक्ता अमन ओझा, राजेश वर्मा, निखिल व्यास, गजेन्द्रप्रताप सिंह राणावत, अंकित मालू, आशीष भारद्वाज, साक्षी श्रीवास्तव, नाहरसिंह बंजारा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, संघर्ष समिति के सदस्य एवं नागरिक उपस्थित रहे।