सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के प्रसंगों से भावविभोर हुए श्रद्धालु, पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुई चतुर्थ श्रीमद्भागवत कथा

गुरु पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का महाआयोजन, चार वर्षों से गुरु स्मृति में हो रहा आयोजन

आस्था का केंद्र बनी गुरु रामनिवास दास महाराज की समाधि, कान संबंधी कष्टों में लाभ की स्थानीय जनमान्यता

किशन वैष्णव

शाहपुरा@स्मार्ट हलचल|रामपुरा रोड स्थित ब्रह्मलीन संत रामनिवास दास महाराज (खाखीजी महाराज) की समाधि स्थल पर ग्रामीण गोपाल तेली द्वारा गुरु स्मृति में आयोजित चतुर्थ श्रीमद्भागवत कथा मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार, पूर्णाहुति, महाआरती एवं महाप्रसादी के साथ संपन्न हुई। सातवें एवं अंतिम दिन कथावाचक पंडित केदार महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन, सुदामा चरित्र, भागवत माहात्म्य तथा राजा परीक्षित मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने निर्धन मित्र सुदामा का जिस प्रेम और आत्मीयता से स्वागत किया, वह बताता है कि प्रभु को धन नहीं, बल्कि भक्त का निष्कपट प्रेम और समर्पण प्रिय है। इसके बाद शुकदेवजी द्वारा राजा परीक्षित को भागवत श्रवण के माध्यम से मोक्ष प्राप्त होने का प्रसंग सुनाया गया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह और श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन की सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

स्थानीय जनश्रुति के अनुसार वर्षों पूर्व संत रामनिवास दास महाराज कोठिया क्षेत्र से खामोर आए थे। उन्होंने नृसिंह मंदिर में साधना, गौसेवा और प्रभु भक्ति के माध्यम से ग्रामीणों को धर्म एवं सेवा का संदेश दिया। उनके सान्निध्य से गांव में धार्मिक वातावरण मजबूत हुआ और लोगों की आस्था निरंतर बढ़ती गई। देवलोक गमन के बाद ग्रामीणों ने उनकी समाधि का निर्माण कराया, जहां चरण पादुकाएं स्थापित कर नियमित पूजा-अर्चना और धूनी की परंपरा शुरू हुई। समय के साथ यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख श्रद्धा केंद्र के रूप में स्थापित हो गया।

ग्रामीण एवं कथा आयोजक गोपाल तेली ने बताया कि गुरु महाराज की स्मृति में पिछले चार वर्षों से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया जा रहा है।ग्रामीणों के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समाधि परिसर एवं परिक्रमा क्षेत्र का लगभग 50 लाख रुपये की अनुमानित लागत से विकास कराया गया है। गुरु पूर्णिमा पर विशेष पूजा-अर्चना, गुरु चरण वंदन, महाआरती तथा हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशाल पंगत महाप्रसादी का आयोजन होगा। इस अवसर पर क्षेत्र सहित दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

समाधि स्थल को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष आस्था है। ग्रामीणों की मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ लगातार पांच सोमवार समाधि पर नारियल, मठड़ी और अगरबत्ती अर्पित कर दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को कान संबंधी कष्टों में लाभ मिलता है। इसी जनविश्वास के कारण प्रत्येक सोमवार बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कान संबंधी लाभ का यह उल्लेख स्थानीय धार्मिक मान्यता एवं जनविश्वास पर आधारित है।