( महेन्द्र नागौरी)
निगम से लेकर 10 पालिकाओं तक आरक्षण की तस्वीर साफ, कई दावेदारों के समीकरण बिगड़े तो नए चेहरों को मौका
भीलवाड़ा| स्मार्ट हलचल|नगर निकाय चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच सोमवार को हुई लॉटरी प्रक्रिया ने जिले की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। नगर निगम भीलवाड़ा सहित जिले की 10 नगर पालिकाओं की लॉटरी के साथ ही संभावित प्रत्याशियों के राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। जिन सीटों पर लंबे समय से दावेदारी की तैयारी चल रही थी, वहां आरक्षण की स्थिति बदलने से कई नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है, जबकि नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान खुलने की संभावना है।
कलेक्ट्रेट सभागार में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर जसमीत सिंह संधू की मौजूदगी में लॉटरी प्रक्रिया संपन्न हुई। सबसे पहले नगर निगम भीलवाड़ा और इसके बाद आसींद, गुलाबपुरा, गंगापुर, हमीरगढ़, बनेड़ा, शाहपुरा, जहाजपुर, बीगोद, मांडलगढ़ और बिजोलिया नगर पालिकाओं की लॉटरी निकाली गई। प्रक्रिया के दौरान विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया।
आरक्षण ने खोले नए सियासी रास्ते:-
लॉटरी के बाद अब राजनीतिक दलों में संभावित प्रत्याशियों को लेकर मंथन तेज होने की उम्मीद है। खासकर नगर निगम और प्रमुख नगर पालिकाओं में आरक्षण की स्थिति के अनुसार भाजपा और कांग्रेस को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी होगी। कई वार्डों में पुराने दावेदार यदि आरक्षण के फेर में बाहर होते हैं तो पार्टियों के सामने नए और प्रभावशाली चेहरों की तलाश चुनौती बनेगी।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें अब टिकट वितरण पर टिक गई हैं। आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद दावेदारों ने अपने राजनीतिक संपर्क मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। वहीं पार्टियों के भीतर टिकट को लेकर खींचतान बढ़ने के भी संकेत हैं।
भाजपा-कांग्रेस के लिए परीक्षा का दौर:-
निकाय चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए स्थानीय पकड़ परखने का बड़ा मौका होंगे। सत्ता पक्ष जहां सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरने की तैयारी करेगा, वहीं विपक्ष स्थानीय समस्याओं, सड़क, पानी, सफाई, अतिक्रमण और शहर के विकास जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।
लॉटरी के बाद सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि राजनीतिक दल किस चेहरे पर दांव लगाते हैं। कई जगह टिकट के लिए पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और नए दावेदारों के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। ऐसे में प्रत्याशी चयन दोनों दलों के लिए आसान नहीं रहने वाला।
प्रशासन ने पारदर्शिता पर दिया जोर
जिला निर्वाचन अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया को निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने की बात कही। प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। उप जिला निर्वाचन अधिकारी हरितिमा और एडीएम सिटी प्रतिभा देवटिया सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के साथ अब चुनावी बिसात बिछ चुकी है। आने वाले दिनों में टिकट के दावेदारों की सक्रियता, राजनीतिक बैठकों और गुटीय समीकरणों के बीच भीलवाड़ा जिले की निकाय राजनीति और अधिक गरमाने के आसार हैं।
