अनिल कुमार
5 एकड़ और 8 लाख की शर्त पर समाज ने भरी हुंकार।
ब्यावर। स्मार्ट हलचल|केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EWS) को दिए गए आरक्षण का लाभ वास्तविक हकदारों तक नहीं पहुँच पाने और इसकी जटिल पात्रता शर्तों के विरोध में आज ब्यावर में एक निर्णायक गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘जन जागृति मंच’ के बैनर तले अजमेर रोड स्थित होटल रामा इन में आयोजित इस ‘महामंथन’ में समाज के सभी वर्गों ने एक सुर में वर्तमान नियमों में क्रांतिकारी बदलाव की मांग की।
अव्यवहारिक शर्तों पर प्रहार
मुख्य वक्ता और जन जागृति मंच के प्रणेता धर्मेंद्र राठौड़ ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लिए तय की गई 8 लाख रुपये की आय सीमा और 5 एकड़ कृषि भूमि की अनिवार्यता आज के समय में पूरी तरह तर्कहीन है। उन्होंने कहा, “कई परिवारों के पास नाममात्र की बंजर भूमि है, लेकिन इस तकनीकी विसंगति के कारण वे आरक्षण से वंचित हो रहे हैं। सरकार की मंशा गरीबों को संबल देना थी, लेकिन ये नियम उनके लिए एक भूलभुलैया बन गए हैं।”
सर्वसमाज की एकजुटता
इस गोष्ठी की खास बात यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग के दिग्गजों ने शिरकत की। कार्यक्रम में विशिष्ट उद्योगपति इन्दर सिंह बागावास, आशीषपाल पदावत, शेख सय्यद मुग़ल पठान महासभा के अध्यक्ष बशीर मोहम्मद, परशुराम जन्मोत्सव संयोजक मनोज शर्मा, राजपूत महासभा के पूर्व अध्यक्ष बजरंग सिंह शेखावत, वरिष्ठ सामाजिक नेत्री कल्पना भटनागर और प्रसिद्ध अधिवक्ता सुलक्षणा शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने इस लड़ाई को किसी जाति विशेष की नहीं, बल्कि ‘गरीब की लड़ाई’ करार दिया।
प्रमुख मांगें और सुझाव:
आय सीमा का पुनर्मूल्यांकन: बढ़ती महंगाई को देखते हुए आय सीमा को अधिक व्यवहारिक बनाया जाए।
संपत्ति मापदंडों में सुधार: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुश्तैनी संपत्ति के कठोर नियमों को सरल किया जाए।
प्रक्रिया का सरलीकरण: अधिवक्ता सुलक्षणा शर्मा ने प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को ‘सिंगल विंडो’ बनाने का सुझाव दिया ताकि युवाओं को कानूनी अड़चनों का सामना न करना पड़े।
भविष्य की रणनीति
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि इन मांगों को लेकर जल्द ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा। मंच ने युवाओं की मदद के लिए एक हेल्पलाइन सेवा शुरू करने पर भी विचार किया। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट अजय शर्मा द्वारा किया गया। गोष्ठी के अंत में परिसर ‘समान अधिकार-समान न्याय’ के नारों से गूँज उठा।
