मंत्रालयिक कर्मचारियों के समर्थन में उतरा महासंघ; सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

पंचायती राज के 16 हजार कर्मचारियों का ‘स्वाभिमान बचाओ आंदोलन’ तेज, मांगें पूरी न होने पर सूबे के 1 लाख कर्मचारी ठप करेंगे काम


राजसमन्द। स्मार्ट हलचल।राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ (पंजीकृत) ने पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत 16 हजार मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों और 1 जून 2026 से जारी ‘स्वाभिमान बचाओ आंदोलन’ को अपना पूर्ण समर्थन देने का एलान किया है,महासंघ ने मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री, मुख्य सचिव और शासन सचिव को पत्र भेजकर पंचायती राज के कर्मचारियों के मांग पत्र पर तुरंत सकारात्मक निर्णय लेने और यथोचित आदेश जारी करने की पुरजोर मांग की है

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष राज सिंह चौधरी, प्रदेश महामंत्री सुनील मोदी और प्रदेश मुख्य सलाहकार कमलेश शर्मा ने संयुक्त बयान में सरकार को कड़े शब्दों में आगाह किया है।उन्होंने कहा कि यदि पंचायती राज संस्थाओं के कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश के 121 विभागों, निगमों और बोर्डों में कार्यरत 1 लाख से अधिक मंत्रालयिक कर्मचारी भी इस आंदोलन में कूद पड़ेंगे।इस व्यापक आंदोलन से उत्पन्न होने वाली समस्त परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।इसी क्रम में जिला शाखा राजसमन्द के जिला अध्यक्ष किशन सिंह झाला ने भी स्पष्ट किया है कि जिला इकाई प्रदेश संगठन के निर्देशानुसार पंचायती राज मंत्रालयिक संगठन के हर संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

मांग पत्र की मुख्य मांगें और आपत्तियां:

  • सिंगल OTP व्यवस्था बंद करने की मांग: पंचायत लेखों में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए वर्तमान ‘सिंगल ओटीपी’ व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने की मांग की गई है। इसके स्थान पर वित्त विभाग के 22 जुलाई 2025 के परिपत्र के अनुसार लेखों में ‘मेकर, चेकर और अप्रूवर’ की त्रिस्तरीय व्यवस्था आवश्यक रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है।
  • समान अधिकार और जॉब-चार्ट: ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ व वरिष्ठ सहायकों का जॉब-चार्ट ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के समान अधिकारों व समकक्षता के साथ तय कर नियमों में व्यवस्थित किया जाए।इसके लिए उत्तराखंड राज्य का पैटर्न पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की गई है।
  • ग्रेड पे ₹3600 और स्नातक योग्यता: कनिष्ठ सहायक (एंट्री स्केल) की शैक्षणिक योग्यता राजस्थान विधानसभा की तर्ज पर ‘स्नातक’ की जाए।साथ ही, स्टेट पैरिटी के आधार पर और प्रथम एसीपी (ACP) की विसंगति दूर करते हुए ग्रेड पे ₹3600 निर्धारित करने की मांग की गई है।
  • कैडर पुनर्गठन व पदोन्नति अवसर: वित्त विभाग के नवीनतम निर्देशों के तहत पंचायती राज संस्थाओं में मंत्रालयिक संवर्ग का कैडर पुनर्गठन कर 56.01 प्रतिशत पदोन्नति के पदों की व्यवस्था की जाए।इसके अतिरिक्त, ग्रामीण विकास राज्य सेवा (RRDS) में पदोन्नति के लाभ हेतु अधीनस्थ सेवा के स्वीकृत पदों में 50 प्रतिशत पद मंत्रालयिक संवर्ग के लिए आरक्षित किए जाएं।
  • अंतर-जिला स्थानांतरण में शिथिलता: वर्ष 2023 की जटिल स्थानांतरण नीति के कारण वर्तमान में एक भी तबादला संभव नहीं हो पा रहा है।अतः नवीन सृजित पदों पर प्रशासनिक शिथिलता देकर इच्छुक कार्मिकों के अंतर-जिला स्थानांतरण की एकबारगी व्यवस्था की जाए।
  • अतिरिक्त कार्यभार और कोताही पर रोक: समान संवर्ग की भांति हार्ड ड्यूटी अलाउंस और अतिरिक्त प्रभार भत्ता स्वीकृत किया जाए, अन्यथा फील्ड ड्यूटी न ली जाए।साथ ही, नियमों के विपरीत एक कनिष्ठ सहायक को दूसरी पंचायत का अतिरिक्त कार्यभार सौंपने की प्रथा को तुरंत बंद किया जाए।

 इस आंदोलन और मांग पत्र को पंचायती राज मंत्रालयिक संगठन के जिला अध्यक्ष महेन्द्र सिंह बोहरा तथा मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष किशन सिंह झाला ने संयुक्त रूप से अपना पूरा समर्थन दिया है।