अनिल कुमार
ब्यावर|स्मार्ट हलचल|शहर में शनिवार को एक गोमाता का पहली बार पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया गया। यह आयोजन मूक प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता और धार्मिक आस्था का प्रतीक बना।यह भावनात्मक आयोजन मनोज जोशी की गोमाता “गौरा” के निधन के बाद संपन्न हुआ। गौरा जोशी परिवार के लिए एक प्रिय सदस्य थीं।मनोज जोशी ने गौरा के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। जयपुर के वरिष्ठ पशु डॉक्टरों से उसका इलाज करवाया गया और जांच रिपोर्ट लखनऊ एम्स तक भेजी गई, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
शनिवार को गौरा की अंतिम यात्रा मनोज जोशी के निवास स्थान शिव मंदिर के पास, दया नगर, ब्यावर से निकाली गई।
यह यात्रा पंडित मोटर्स, सातपुलिया, रोडवेज बस स्टैंड, भगत चौराहा, छावनी, भोम्याजी का थान होते हुए मेडिया ग्राम स्थित उनके निजी निवास “गौविला” पहुंची। मार्ग में अनेक गोभक्तों और श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित की।
गौविला” में सैकड़ों गोभक्तों की मौजूद में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ गोमाता गौरा का अंतिम संस्कार किया गया।
यह आयोजन मनोज जोशी के गोमाता के प्रति समर्पण को दर्शाता है। जब उनसे बात करने का प्रयास किया गया, तो वे इतने भावुक थे कि कुछ भी कहने में असमर्थ रहे।













