वन अपराधों के खिलाफ विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति आगे भी पूरी सख्ती के साथ लागू रहेगी
बूंदी- स्मार्ट हलचल।जिले में वन विभाग ने दो दिन में तीन बड़ी कार्रवाई कर अवैध खनन में प्रयुक्त एक जेसीबी मशीन एवं चार ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की है. साथ ही लकड़ी से भरा एक ट्रक पकड़ा है. वन भूमि से अतिक्रमण हटाया है. बूंदी के उपवन संरक्षक डॉ. ए.एन. गुप्ता ने बताया कि वन अपराधों, अवैध खनन, अवैध लकड़ी परिवहन एवं वन भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है, जिसमें वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत भविष्य में भी इसी तरह की प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी.
वन भूमि पर भूमाफियाओं का कब्जा हटाया: डीएफओ आलोक नाथ गुप्ता ने बताया कि बुधवार दोपहर बूंदी रेंज के सथूर गेट नाका स्थित वनखंड नया बाग में मानकचंद सोनी ने कब्जा किया हुआ था. बुधवार को वन टीम ने जेसीबी मशीन और रेंजर विक्रम हुण की अगुवाई में उसे हटा दिया।
इसी प्रकार नैनवां के सहायक वन संरक्षक सुनील कुमार धाबाई ने वनरक्षक चंदन सिंह, दयाराम गुर्जर, राजकुमार चंदेल एवं बहादुर सिंह हाड़ा के साथ हिंडोली रेंज के नाका बसोली अंतर्गत आबड़ गांव के समीप वन क्षेत्र में दबिश दी. मौके पर आबड़ नदी से अवैध रूप से काली रेत का खनन किया जा रहा था. वन विभाग की टीम को देखते ही खनन में लगे लोग अंधेरे का फायदा उठाकर वाहन छोड़कर फरार हो गऐ
कार्रवाई के दौरान ,एक जेसीबी मशीन एवं चार ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गईं. बाद में क्षेत्रीय वन अधिकारी विक्रम हुण के नेतृत्व में गश्ती दल मौके पर पहुंचा और सभी वाहनों को बूंदी नर्सरी परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया. मामले में राजस्थान वन अधिनियम, 1953 के तहत प्रकरण दर्ज कर फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है.
डीएफओ गुप्ता ने बताया कि वन विभाग ने डाबी क्षेत्रीय वन अधिकारी मनीष कुमार शर्मा के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 स्थित धनेश्वर टोल प्लाजा पर नाकाबंदी की. इस दौरान लकड़ी से भरे एक ट्रक को जब्त किया. मौके से महबूब निवासी बालापुरा, थाना दबलाना को गिरफ्तार कर लिया गया. जब्त ट्रक को रेंज कार्यालय डाबी में खड़ा कराया गया है.
उप वन संरक्षक डॉ. गुप्ता ने कहा कि वन अपराधों के खिलाफ विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति आगे भी पूरी सख्ती के साथ लागू रहेगी. अवैध खनन, अवैध लकड़ी परिवहन, वन भूमि पर अतिक्रमण तथा अन्य वन अपराधों में लिप्त लोगों के खिलाफ राजस्थान वन अधिनियम, 1953 एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी.
