स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लक्ष्मी दत्त कांटिया की पुण्यतिथि मनाई उनके बुलावे पर नेहरू भी शाहपुरा आए थे

राजेन्द्र खटीक

शाहपुरा-स्मार्ट हलचल|शाहपुरा राज्य प्रजामंडल आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में शामिल तथा वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के सेनानी स्वर्गीय लक्ष्मी दत्त कांटिया की 20 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
स्वर्गीय लक्ष्मी दत्त कांटिया स्मृति संस्थान के अध्यक्ष अमित कांटिया ने बताया कि कांटिया ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनकी पुण्यतिथि पर बुधवार शाम राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुंड गेट में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षा उपनिदेशक सत्य स्वरूप उपाध्याय ने की, जबकि मुख्य अतिथि शाहपुरा थाना अधिकारी गोपाल मालवीय तथा विशिष्ट अतिथि शाहपुरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट आशीष पालीवाल रहे। अतिथियों ने स्वर्गीय कांटिया के जीवन एवं स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि डॉ. कैलाश मंडेला ने किया। वरिष्ठ पत्रकार मूलचंद पेशवानी, शाहपुरा बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा तथा सत्यनारायण सेन ने भी अपने संस्मरण साझा किए।
डॉ. मंडेला ने बताया कि स्वर्गीय कांटिया ने आजीवन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली पेंशन अथवा किसी भी सरकारी सुविधा का उपयोग नहीं किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वे अजमेर सेंट्रल जेल में 16 माह नजरबंद रहे। इस दौरान वे राज्य के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों एवं क्रांतिकारियों के संपर्क में रहे और प्रदेशभर में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाई।
उन्होंने बताया कि कांटिया के महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से भी संबंध रहे। उनके आमंत्रण पर जवाहरलाल नेहरू पहली बार शाहपुरा आए थे। वर्ष 1946 में शाहपुरा के दिलकुशल बाग में राज्य प्रजामंडल आंदोलन का अधिवेशन आयोजित हुआ था। उस दौरान जवाहरलाल नेहरू के प्रतिनिधि के रूप में शेख अब्दुल्ला शाहपुरा आए थे और दिलकुशल बाग का नाम ‘आजाद मैदान’ रखा गया था।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांटिया ने जोधपुर के प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अचलेश्वर प्रसाद शर्मा के साथ मिलकर ‘प्रजा सेवक’ नामक अखबार का प्रकाशन भी कराया। वे मेवाड़ की देशी रियासतों में घूम-घूमकर लोगों में स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति जागरूकता पैदा करते रहे।
वरिष्ठ पत्रकार मूलचंद पेशवानी ने बताया कि देश की आजादी के बाद भी स्वर्गीय कांटिया ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली पेंशन अथवा अन्य सरकारी सुविधाओं का आजीवन उपयोग नहीं किया। वर्ष 1977-78 में हुए आम चुनाव में वे शाहपुरा नगर पालिका के निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।
उन्होंने बताया कि गत 24 दिसंबर को नगर परिषद शाहपुरा की ओर से उनके गृह क्षेत्र के मार्ग का नामकरण भी स्वर्गीय लक्ष्मी दत्त कांटिया के नाम पर किया गया।
श्रद्धांजलि समारोह में रामस्वरूप काबरा, पूखराज जोशी, चंद्रप्रकाश जोशी, शंकर सिंह राठौड़, प्रताप सिंह रानावत, डॉ. इशाक खान, जयंत जीनगर, इस्माइल खान कायमखानी, थानमल परिहार, अशोक चास्टा, तारा चास्टा, परमेश्वर प्रसाद कुमावत, नारायण लाल जाट, देवीलाल बेरवा, कैलाश जाड़ावत, चित्रांश शर्मा, धर्मराज सिंह सौदा सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं आमजन मौजूद रहे।