किशन खटीक
रायपुर 26 अप्रैल अप्र उमरी, रायपुर।स्मार्ट हलचल|भीलवाड़ा जिले के छोटे से गांव उमरी के निवासी डॉ. कैलाश चन्द्र खटीक ने हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और व्यक्तिगत संघर्षों के बावजूद उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
डॉ. खटीक का शोध विषय “मन्नू भंडारी के कथा साहित्य में मध्यवर्गीय महिला का सामाजिक एवं पारिवारिक संघर्ष : एक अध्ययन” रहा। इस शोध में उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार मन्नू भंडारी के कथा साहित्य के माध्यम से मध्यवर्गीय महिलाओं के जीवन, उनके संघर्ष, सामाजिक दबावों और पारिवारिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनका यह शोध हिंदी साहित्य के सामाजिक विमर्श को नई दृष्टि प्रदान करने वाला माना जा रहा है।
डॉ. खटीक की सफलता की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही भावनात्मक भी है। महज 20-22 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया, जिनका निधन गंभीर बीमारी के चलते हुआ। उनके माता-पिता साधारण किसान थे और खेती के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक रूप से सीमित परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षा के महत्व को समझाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
माता-पिता के असमय निधन के बाद जीवन की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं, लेकिन इस कठिन समय में उनके दोनों बड़े भाइयों ने उनका हौसला बनकर हर परिस्थिति में साथ दिया। भाइयों का सहयोग, परिवार का विश्वास और खुद की मेहनत ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी।
डॉ. खटीक ने अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का श्रेय अपने स्वर्गीय माता-पिता, बड़े भाइयों, परिवारजनों, मित्रों और शुभचिंतकों को देते हुए कहा कि उन्हीं के आशीर्वाद और सहयोग से वे इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से अपने माता-पिता को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया, जिनकी सीख आज भी उनके जीवन का मार्गदर्शन कर रही है।
वर्तमान में डॉ. कैलाश चन्द्र खटीक राजसमंद जिले के आमेट स्थित श्री हीरालाल देवपुरा राजकीय महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे न केवल विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।
उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और परिचितों ने उन्हें बधाइयां दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गांव उमरी सहित आसपास के क्षेत्रों में यह उपलब्धि युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ संकल्प, मेहनत और आगे बढ़ने की लगन हो, तो कोई भी बाधा उसे सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती।
डॉ. खटीक की यह सफलता यह संदेश देती है कि विपरीत परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
